पंचकूला/चंडीगढ़ (कृषि ब्यूरो): हरियाणा के ग्रामीण इलाकों और कृषि सेक्टर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक सौगात लेकर आया है। खरीफ सीजन में धान, मक्का और कपास की फसलों के बीच राज्य सरकार ने अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए एक अभूतपूर्व मुहिम का आगाज किया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सूबे के सुदूर गांवों में रहने वाले छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें अपनी उपज का सही दाम दिलाने के लिए नई रणनीतिक योजनाओं की घोषणा की है।
हरियाणा एफपीओ मिशन-2026' का बावल से हुआ भव्य शुभारंभ
कृषि ब्यूरो प्रमुख धर्मेंद्र आचार्य की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के बावल क्षेत्र से हरियाणा एफपीओ मिशन-2026 की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी पहल का सीधा उद्देश्य छोटे एवं सीमांत किसानों तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को संगठित कर उन्हें बेहतर बाजार, अधिक आय और नए व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराना है।
इस मिशन के तहत अब छोटे किसानों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति मिलेगी और वे सीधे नेशनल मार्केट्स में अपनी फसल उचित दरों पर बेच सकेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया बूस्ट मिलेगा।
प्राकृतिक खेती इस सदी की सबसे बड़ी जरूरत, रासायनिक खादों पर लगेगा ब्रेक
इधर पंचकूला में आयोजित एक विशेष राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रगतिशील किसानों से सीधा संवाद किया। बैठक में मौजूद कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग से न केवल जमीन बंजर हो रही है बल्कि अनाज के जरिए यह जहर इंसानों के शरीर में पहुंचकर कैंसर जैसी भयानक बीमारियां फैला रहा है।
सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए किसानों से अपील की है कि वे अब खेतों में डीएपी (DAP) और पेस्टीसाइड्स का उपयोग पूरी तरह बंद करें। इसके बजाय देसी गाय के गोबर और जैविक तरीकों से तैयार प्राकृतिक खेती को अपनाएं जिसके लिए कृषि विभाग द्वारा विशेष तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा रही है।
बजट घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने की तैयारी, अनुदान राशि को लेकर नई गाइडलाइन
Directorate of Agriculture and Farmers Welfare, Haryana के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस साल के बजट में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ 10,000 रुपये तक के विशेष अनुदान का जो प्रावधान किया गया था उसे अब सीधे ग्राउंड पर लागू किया जा रहा है।
इसके साथ ही खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए बिजली प्रबंधन और 'हरियाणा एग्री डिस्कॉम' के नए प्रस्तावों पर भी तेजी से काम शुरू हो गया है। सरकार का दावा है कि इन संयुक्त प्रयासों से न केवल खेती की लागत आधी होगी बल्कि देश और दुनिया भर में हरियाणा के आर्गेनिक उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ेगी।
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