मंगलवार, 11 अगस्त 2026

भारत से 2030 तक खत्म होगा हेपेटाइटिस, सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और इलाज का बड़ा अभियान शुरू

Written by: Saloni Yadav

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राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) के तहत केंद्र सरकार ने जिला व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक बढ़ाई सुविधाएं; समय पर पहचान, मुफ्त एंटी-वायरल दवाओं और नवजात शिशुओं के टीकाकरण से बीमारी को जड़ से खत्म करने की तैयारी।


केंद्र सरकार राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और एंटी-वायरल दवाएं उपलब्ध करा रही है।
केंद्र सरकार राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और एंटी-वायरल दवाएं उपलब्ध करा रही है।. Source: Md Ariful Islam / Getty Images
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नई दिल्ली। देश को गंभीर लिवर बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) का दायरा बढ़ा दिया है। वर्ष 2030 तक भारत को वायरल हेपेटाइटिस से पूरी तरह मुक्त करने के संकल्प के साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय अब जिला अस्पतालों से लेकर दूर-दराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) तक जांच और दवाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित कर रहा है।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य हेपेटाइटिस B और C के मरीजों को समय पर पहचान कर उन्हें महंगा इलाज मुफ्त में उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को लिवर सिरोसिस या कैंसर जैसी खतरनाक अवस्था तक पहुंचने से रोका जा सके।

क्या है हेपेटाइटिस और क्यों माना जाता है इसे ‘साइलेंट किलर’?

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से समझें तो हेपेटाइटिस मानव लिवर (यकृत) में होने वाले गंभीर संक्रमण और सूजन की स्थिति को कहा जाता है। यह मुख्य रूप से 5 अलग-अलग वायरस वेरिएंट्स— A, B, C, D और E के कारण होता है।

जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य तंत्र की नई व्यवस्था

अभियान को असरदार बनाने के लिए सरकार ने तीन-स्तरीय रणनीति पर काम शुरू किया है। पहली प्राथमिकता के तहत देश के सभी ब्लड बैंकों में रक्त की अनिवार्य वायरस स्क्रीनिंग की जा रही है और अस्पतालों में डायलिसिस मशीनों के संक्रमण-मुक्त इस्तेमाल के सख्त एसओपी (SOP) लागू किए गए हैं।

दूसरी ओर, नवजात बच्चों को जन्म के 24 घंटे के भीतर अनिवार्य हेपेटाइटिस-बी बर्थ-डोज वैक्सीन दी जा रही है। तीसरे चरण में, आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे गांवों और कस्बों में संदिग्ध लक्षण वाले लोगों की पहचान कर उन्हें निकटतम आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मुफ्त रैपिड टेस्ट और 12 से 24 हफ्ते का ओरल दवा कोर्स पूरा कराएं।

Saloni Yadav
लेखक के बारे में Saloni Yadav

सलोनी यादव 'विराट भारत न्यूज़' में वरिष्ठ शिक्षा एवं जनहित मामलों की संपादक हैं। वे शिक्षा विभाग, प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC, REET, CET), केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के दैनिक काम की खबरों का सटीक विश्लेषण करती हैं। उनका उद्देश्य छात्रों और आम जनता तक सही समय पर प्रामाणिक जानकारी पहुँचाना है। View all posts by Saloni Yadav →

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