NALSAR 2026 Batch: 24 घंटे में कैसे बदला BCI का रुख? बैन से लेकर क्लीन चिट तक की पूरी कहानी

NALSAR हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों के लिए BCI का बड़ा फैसला! एडवोकेट नामांकन पर लगा प्रतिबंध पूरी तरह हटा दिया गया है। जानिए कैसे एक ही रात में बदला पूरा घटनाक्रम और छात्रों को मिली राहत।

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Haidarabad News: लीगल एजुकेशन के प्रतिष्ठित केंद्र ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ (NALSAR) के कैंपस में बीते 24 घंटे किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहे। जिस बैच के सैकड़ों छात्रों का भविष्य कानूनी दांव-पेच और अनिश्चितता के भंवर में फंसता दिख रहा था, उन्हें अचानक बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से एक ऐसी खबर मिली जिसने पूरी तस्वीर ही बदल दी।

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​13 अगस्त को शुरू हुआ एक प्रशासनिक विवाद 14 अगस्त की सुबह होते-होते पूरी तरह खत्म हो गया। BCI ने न सिर्फ 2026 बैच के छात्रों के एडवोकेट नामांकन पर लगी सामूहिक रोक हटाई, बल्कि पूरे मामले की जांच और कार्यवाहियों को हमेशा के लिए बंद (Close) करने का ऐलान कर दिया।

​क्या था पूरा मामला और क्यों मचा बवाल?

​विवाद की चिंगारी NALSAR के दीक्षांत समारोह को लेकर सुलगी थी। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की मौजूदगी प्रस्तावित थी। इस बीच खबरें आईं कि छात्रों के एक गुट ने इस भागीदारी पर आपत्ति जताते हुए एक मुहिम शुरू की है।

​मामला जैसे ही BCI के पास पहुंचा, काउंसिल के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने इसे न्यायपालिका के सम्मान से जोड़ते हुए सख्त रुख अपनाया। 13 अगस्त को NALSAR के वाइस-चांसलर और सभी ‘स्टेट बार काउंसिल्स’ को पत्र जारी कर निर्देश दिया गया कि 2026 बैच के किसी भी छात्र का एडवोकेट के रूप में नामांकन रोक दिया जाए।

​इस एक फैसले ने उन सैकड़ों छात्रों के सपनों और सालों की मेहनत पर सवालिया निशान लगा दिया, जिन्होंने हाल ही में अपनी लॉ की पढ़ाई पूरी की थी।

​यू-टर्न ओर जब काउंसिल को समझ आई मास पनिशमेंट की गलती

​सामूहिक रोक के फैसले के तुरंत बाद कानूनी गलियारों और पूर्व जजों-वकीलों के बीच इस बात पर चर्चा छिड़ गई कि कुछ लोगों की वजह से पूरे बैच को सजा देना कितना जायज है?

​BCI ने स्थिति की समीक्षा की और 13 अगस्त की शाम ही अपने आदेश को संशोधित (Letter BCI:D:5450/2026) कर दिया। नए आदेश में काउंसिल ने यह माना कि:

  • ​2026 बैच के बहुसंख्यक (Majority) छात्र पूरी तरह निर्दोष हैं।
  • ​छात्रों का किसी भी ‘अनादर वाले आंदोलन’ में शामिल होने का इरादा नहीं था।

देखिये संशोधित लेटर:

संशोधित लेटर
संशोधित लेटर

संशोधित लेटर
संशोधित लेटर

इसी सिद्धांत को दोहराते हुए कि “बिना किसी गलती के किसी भी छात्र को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा”, BCI ने छात्रों को देश के किसी भी State Bar Council में अपनी मर्जी से प्रैक्टिस के लिए रजिस्टर कराने की छूट दे दी।

कैंपस के अंदरूनी सूत्र और उकसाने की बात:

BCI ने अपने संशोधित नोट में यह भी संकेत दिया था कि विवाद के पीछे कुछ बाहरी तत्व और संस्थान के कुछ शिक्षकों की भूमिका हो सकती है, जो छात्रों को गुमराह कर रहे थे।

 

​14 अगस्त की तड़के आया अंतिम फैसला – अब कोई कार्यवाही नहीं होगी

​घटनाक्रम का सबसे बड़ा मोड़ 14 अगस्त की सुबह देखने को मिला। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं, कानूनविदों, बार के सदस्यों और आम जनता से मिले फीडबैक के बाद काउंसिल इस नतीजे पर पहुंची है कि 2026 बैच का कोई भी छात्र प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी गलत गतिविधि में शामिल नहीं था।

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​इसके साथ ही, BCI ने NALSAR मामले में चल रही सभी कार्यवाहियों को आधिकारिक रूप से समाप्त (Proceedings Closed) कर दिया। यानी अब न तो छात्रों पर कोई जांच की तलवार लटकी है और ना ही भविष्य में उन्हें किसी तरह का स्पष्टीकरण देना होगा।

​छात्रों के लिए अब आगे क्या?

​इस पूरे घटनाक्रम के शांत होने के बाद NALSAR 2026 बैच के ग्रेजुएट्स के लिए रास्ते पूरी तरह साफ हो चुके हैं:

  • नामांकन की पूर्ण आजादी: छात्र दिल्ली, महाराष्ट्र, यूपी, तेलंगाना या अपनी पसंद के किसी भी स्टेट बार काउंसिल में वकील के रूप में रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।
  • करियर पर कोई दाग नहीं: BCI ने आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया है कि पूरा बैच निर्दोष है, जिससे ऑल इंडिया बार एग्जाम (AIBE) या प्रैक्टिस में कोई बाधा नहीं आएगी।
  • संस्थान को राहत: यूनिवर्सिटी प्रशासन के सिर पर लटकी विस्तृत जांच रिपोर्ट की तलवार भी अब निष्प्रभावी हो गई है।

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