हरियाणा में TB के खिलाफ जंग का ऐलान, अब सांसद-विधायक संभालेंगे कमान

हरियाणा सरकार ने टीबी के खिलाफ लड़ाई को नया रूप दिया है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव के मुताबिक अब हर जिले के सांसद और विधायक टीबी मुक्त भारत अभियान के जिला चेयरपर्सन होंगे। जानें आपके जिले की कमान किसके हाथ।

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विराट भारत न्यूज़ (हरियाणा): हरियाणा में टीबी के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ़ डॉक्टरों और अस्पतालों के भरोसे नहीं रहेगी। सरकार ने इस बार एक ऐसा रास्ता चुना है, जिसमें बीमारी से लड़ाई को सीधे नेताओं के कंधों पर डाल दिया गया है।

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प्रदेश के हर जिले के सांसद और विधायक अब इस मुहिम की कमान संभालेंगे। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि इन सभी को टीबी मुक्त भारत अभियान का जिला स्तरीय चेयरपर्सन बनाया गया है। पर सवाल यह है कि सरकार को नेताओं की ज़रूरत क्यों पड़ी।

नेताओं को क्यों जोड़ा

इसकी वजह ख़ुद स्वास्थ्य मंत्री ने बताई। उनका कहना है कि टीबी सिर्फ़ दवा से नहीं हारती, इसे हराने के लिए लोगों तक पहुंचना पड़ता है, और जनता से जितना सीधा जुड़ाव एक नेता का होता है, उतना किसी का नहीं।

आरती सिंह राव के मुताबिक ये जनप्रतिनिधि अपने इलाके में लोगों को समय पर जांच और इलाज के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही टीबी को लेकर समाज में फैली उस गलतफहमी और शर्म को भी तोड़ेंगे, जिसकी वजह से मरीज़ अक्सर बीमारी छुपाते हैं और इलाज में देर हो जाती है।

उन्होंने माना कि हरियाणा ने टीबी की पहचान और इलाज में अच्छी प्रगति की है, लेकिन असली मंज़िल अभी दूर है। उन्होंने लोगों से अपील की, “आइए, टीबी मुक्त हरियाणा के लिए एकजुट हों, ताकि प्रदेश स्वस्थ हो।”

अब किसके हाथ कमान

सबसे बड़ा सवाल यही कि किस जिले की जिम्मेदारी किसे मिली। सरकार ने पूरी सूची जारी कर दी है।

अंबाला की कमान सांसद रेखा शर्मा और नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी के हाथ है। भिवानी में विधायक घनश्याम सर्राफ और बवानी खेड़ा विधायक कपूर सिंह अध्यक्ष होंगे, तो चरखी दादरी की जिम्मेदारी दादरी विधायक सुनील सतपाल सांगवान और बाढड़ा विधायक उमेद सिंह को दी गई है।

फरीदाबाद में तीन विधायकों को यह दायित्व मिला है। इनमें बल्लभगढ़ के मूलचंद शर्मा, एनआईटी के सतीश कुमार फागना और बड़खल के धनेश अदलखा शामिल हैं। फतेहाबाद में सांसद कार्तिकेय शर्मा और रतिया विधायक जरनैल सिंह को कमान मिली है, जबकि गुरुग्राम में सोहना के तेजपाल तंवर, पटौदी की बिमला चौधरी और गुरुग्राम के मुकेश शर्मा मोर्चा संभालेंगे।

आगे बढ़ें तो हांसी में विधायक विनोद भयाना और हिसार में विधायक सावित्री जिंदल व नलवा विधायक रणधीर सिंह पनिहार को जिम्मेदारी दी गई है। झज्जर में बहादुरगढ़ विधायक राजेश जून, जींद में विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री और राम कुमार गौतम, तथा कैथल में पुंडरी विधायक सतपाल जांबा अभियान की अगुवाई करेंगे।

करनाल में सबसे ज़्यादा चार जनप्रतिनिधियों को कमान सौंपी गई है। इनमें इंद्री के राम कुमार कश्यप, करनाल के जगमोहन आनंद, असंध के योगिंदर सिंह राणा और नीलोखेड़ी के भगवान दास शामिल हैं। इसके अलावा कुरुक्षेत्र में सांसद नवीन जिंदल, महेंद्रगढ़ में नारनौल विधायक ओम प्रकाश यादव व महेंद्रगढ़ विधायक कंवर सिंह, नूंह में सांसद संजय भाटिया व विधायक मोहम्मद इलियास, और पलवल में होडल विधायक हरिंदर सिंह व विधायक मोहम्मद इसराइल को अध्यक्ष बनाया गया है।

आज़ादी से क्यों जोड़ा

स्वास्थ्य मंत्री ने इस पूरी मुहिम को स्वतंत्रता दिवस से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आज़ादी सिर्फ़ बंधनों से मुक्ति नहीं है, बीमारी से मुक्ति भी एक स्वस्थ और गरिमापूर्ण जीवन की आज़ादी है।

उनका कहना है कि ये सभी चेयरपर्सन अपने-अपने जिलों में टीबी के खिलाफ एक जन-आंदोलन खड़ा करेंगे, ताकि यह लड़ाई सरकारी फ़ाइलों से निकलकर गली-मोहल्ले तक पहुंचे।

हरियाणा में टीबी का आंकड़ा

लोकसभा में उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में टीबी के नोटिफाइड मामलों की संख्या 2021 में 69,083 थी, जो 2025 में बढ़कर 88,513 हो गई। यह बढ़ोतरी केवल बीमारी के प्रसार का संकेत नहीं मानी जा सकती क्योंकि सक्रिय स्क्रीनिंग और बेहतर केस डिटेक्शन के कारण पहले से छिपे मरीज भी सामने आ रहे हैं।

वहीं हरियाणा ने 2025 में 2,157 ग्राम पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित किया था, जो राज्य की कुल 6,237 पंचायतों का लगभग 35 प्रतिशत है।

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