शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

Sirsa Fast Track Court Decision: सिरसा में छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले दोषियों पर कोर्ट का बड़ा फैसला, एक को 5 साल और दूसरे को 2 साल की जेल

Written by: Vipin Zaildar

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सिरसा: हरियाणा के सिरसा जिले से महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद नजीर पेश करने वाला अदालती फैसला सामने आया है। स्कूल से अपने घर लौट रही 10वीं कक्षा…


सिरसा में छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले दोषियों पर कोर्ट का बड़ा फैसला
सिरसा में छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले दोषियों पर कोर्ट का बड़ा फैसला
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सिरसा: हरियाणा के सिरसा जिले से महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद नजीर पेश करने वाला अदालती फैसला सामने आया है। स्कूल से अपने घर लौट रही 10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा का रास्ता रोककर उसके साथ अश्लील छेड़छाड़ करने, मोबाइल नंबर मांगने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने के गंभीर मामले में सिरसा की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। विशेष अदालत के न्यायाधीश डॉ. नरेश कुमार सिंघल ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए वीरवार को उन्हें अलग-अलग अवधि के कड़े कारावास की सजा सुनाई।
इस अदालती फैसले ने यह साफ कर दिया है कि समाज में कानून-व्यवस्था और विशेष रूप से स्कूल आने-जाने वाली छात्राओं के साथ इस प्रकार की घिनौनी हरकतें करने वाले असामाजिक तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहद त्वरित तरीके से सुनवाई पूरी की और दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया।

दोषी सुनील को पांच वर्ष और राजेंद्र को दो वर्ष कैद की सजा

फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. नरेश कुमार सिंघल ने मामले से जुड़े दोनों आरोपियों की भूमिका को देखते हुए अलग-अलग सजा का निर्धारण किया है। अदालत ने मुख्य दोषी सुनील को पांच वर्ष के कड़े कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 12 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। यदि सुनील जुर्माने की राशि भरने में विफल रहता है, तो उसे अतिरिक्त जेल की अवधि काटनी होगी।
इसके अलावा, इस पूरे अपराध में सुनील का साथ देने वाले और पीड़ित छात्रा को डराने-धमकाने वाले दूसरे दोषी राजेंद्र को अदालत ने दो वर्ष की कैद की सजा सुनाई है और उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अकाट्य सबूत और गवाह पेश किए, जिसके आधार पर कोर्ट ने दोनों को बुधवार को दोषी पाया था और वीरवार को सजा के कानूनी प्रावधानों को लागू कर दिया।

साल 2023 का है मामला: स्कूल से लौटते समय हुआ था अपराध

अदालत में चले इस पूरे आपराधिक अभियोग और दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, यह घटना जुलाई 2023 की है। पीड़ित छात्रा 10वीं कक्षा में पढ़ती थी और उसका स्कूल उसके अपने गांव के पास स्थित एक पड़ोसी गांव में था। चूंकि दूरी ज्यादा नहीं थी, इसलिए वह रोजाना पैदल ही अपने स्कूल आती और जाती थी। 8 जुलाई 2023 को दोपहर करीब दो बजे, जब वह स्कूल की छुट्टी होने के बाद सामान्य तरीके से अपने घर लौट रही थी, तो रास्ते के सुनसान मोड़ पर गांव के ही दो युवक सुनील और राजेंद्र पहले से ही घात लगाकर खड़े थे।
छात्रा को अकेला पाकर सुनील ने अचानक उसका रास्ता रोक लिया। उसने जबरन छात्रा का हाथ पकड़ लिया और अश्लील हरकतें करते हुए उस पर दोस्ती करने का दबाव बनाने लगा। इतना ही नहीं, सुनील ने छात्रा से उसका पर्सनल मोबाइल नंबर भी मांगा ताकि वह उसे परेशान कर सके।

विरोध करने पर दी थी जान से मारने की धमकी, छात्रा के शोर से भागे आरोपी

जब नाबालिग छात्रा ने सुनील की इस हरकत का कड़ा विरोध किया और अपना हाथ छुड़ाने का प्रयास किया, तो वहां मौजूद दूसरे आरोपी राजेंद्र ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। राजेंद्र ने छात्रा को डराते हुए कहा कि यदि उसने सुनील को अपना मोबाइल नंबर नहीं दिया या इस बात की जानकारी अपने परिवार को दी, तो वह उसे जान से मार देगा।
इस अप्रत्याशित संकट और धमकी से डरे बिना छात्रा ने अदम्य साहस का परिचय दिया और जोर-जोर से चिल्लाना व शोर मचाना शुरू कर दिया। दिन के समय छात्रा की आवाज सुनकर जब आसपास के खेतों से लोगों के आने की आहट हुई, तो दोनों आरोपी पकड़े जाने के डर से मौके से भाग खड़े हुए। पीड़ित छात्रा किसी तरह रोती-बिलखती अपने घर पहुंची और अपनी मां को इस पूरी आपबीती की जानकारी दी।

बदनामी के डर से शुरू में चुप रहा परिवार, दोबारा धमकी मिलने पर दर्ज कराई एफआईआर

भारतीय ग्रामीण परिवेश में अकसर देखा जाता है कि ऐसे मामलों में लोक-लाज और समाज में बेटी की बदनामी के डर से परिवार तुरंत कानूनी कदम उठाने से हिचकिचाता है। इस मामले में भी पीड़ित छात्रा के माता-पिता ने शुरू में समाज के डर से तत्काल पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज नहीं करवाई। लेकिन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि 12 जुलाई 2023 को सुनील और राजेंद्र दोबारा छात्रा के घर के बाहर पहुंच गए। उन्होंने पूरे परिवार को गालियां दीं और पुलिस के पास न जाने के लिए हथियार और जान की धमकी देकर डराने की कोशिश की।
इस घटना के बाद परिवार का सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने डरने के बजाय न्याय की राह चुनी। 13 जुलाई 2023 को बड़ागुढ़ा थाना पुलिस में दोनों आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई गई। बड़ागुढ़ा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विभिन्न गंभीर धाराओं और पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और पुख्ता चार्जशीट तैयार करके कोर्ट में पेश की।

त्वरित न्याय प्रणाली की मिसाल बनी सिरसा की फास्ट ट्रैक कोर्ट

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के निपटारे के लिए स्थापित की गई फास्ट ट्रैक अदालतों का महत्व इस फैसले से एक बार फिर साबित हुआ है। मात्र तीन साल के भीतर पूरी न्यायिक प्रक्रिया को अंजाम देकर गवाहों के बयान दर्ज किए गए और दोषियों को जेल भेजा गया। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के त्वरित अदालती फैसलों से समाज के अपराधियों में कानून का डर पैदा होता है और पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और अधिक सुदृढ़ होता है। सिरसा की इस अदालत के निर्णय की क्षेत्र के सामाजिक संगठनों और आम जनता ने भी सराहना की है।

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Vipin Zaildar
About the Author Vipin Zaildar

विपिन जैलदार 'विराट भारत न्यूज़' के मुख्य विशेष संवाददाता हैं। वे खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism), अपराध जगत (Crime Reporting), SOG एवं STF की विशेष कार्रवाइयों और हरियाणा व राजस्थान के क्षेत्रीय एवं जमीनी मुद्दों को गहराई से कवर करने में माहिर हैं। वे अपनी निडर और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। View all posts by Vipin Zaildar →

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