Chandigarh News: महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और लैंगिक रूप से संवेदनशील कार्यस्थल सुनिश्चित करने की दिशा में हरियाणा सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. अक्सर देखा जाता है कि बड़ी कंपनियों या सरकारी दफ्तरों में तो आंतरिक शिकायत समितियां (Internal Committees) होती हैं, लेकिन घरों में काम करने वाली बाई, खाना बनाने वाली महिलाएं या असंगठित क्षेत्रों (Unorganized Sectors) में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं देता। इसी कमी को दूर करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD), हरियाणा ने बड़े नियमों को स्पष्ट किया है.
अब हरियाणा में काम करने वाली कोई भी घरेलू कामगार (Domestic Worker) महिला अपने साथ होने वाले किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या यौन उत्पीड़न की शिकायत जिला स्तर पर गठित ‘स्थानीय समिति’ (Local Committee) के पास बेझिझक दर्ज करा सकती है.
पंचकूला में हुआ राज्य स्तरीय प्रशिक्षण, POSH एक्ट को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी
पंचकूला में महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक डॉ. प्रियंका सोनी की अध्यक्षता में ‘कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013’ यानी POSH Act और SHe-Box पोर्टल को लेकर एक उच्च स्तरीय राज्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया.
प्रशिक्षण में डॉ. प्रियंका सोनी ने सुरक्षित कार्यस्थल को महिलाओं का मौलिक अधिकार बताते हुए, POSH अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन और जिला स्तर पर शिकायत तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया.
स्थानीय समिति (Local Committee) की भूमिका
नए नियमों के अनुसार, 10 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों और घरेलू कामगारों (जैसे- खाना बनाने या सफाई करने वाली महिलाएं) की सुरक्षा के लिए ‘स्थानीय समिति’ सीधे शिकायतें दर्ज करेगी. यह समिति सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग करते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
‘SHe-Box’ पोर्टल: ऑनलाइन शिकायत की सुविधा
इस बैठक में SHe-Box (Sexual Harassment Electronic Box) पोर्टल को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म महिलाओं को घर बैठे यौन उत्पीड़न की शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करने और उनकी ट्रैकिंग करने में सक्षम बनाता है, जिससे मामले सीधे स्थानीय या आंतरिक समिति तक पहुंच जाते हैं।
कानूनी जागरूकता पर जोर
कार्यक्रम में POSH एक्ट के अलावा ‘दहेज निषेध अधिनियम, 1961’ और ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005’ के तहत भी विभिन्न मामलों की समीक्षा की गई। उद्देश्य संरक्षण अधिकारियों और स्थानीय समिति के अध्यक्षों को कानूनी रूप से सशक्त बनाकर न्याय सुनिश्चित करना है।




