विराट भारत न्यूज़ / नई दिल्ली : भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित बस्तर क्षेत्र से आए एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर के बदलते धरातली परिदृश्य पर गहरी खुशी व्यक्त की। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि कभी हिंसा, गोलियों की गूंज और पिछड़ेपन के लिए जाने जाना वाला बस्तर अब विकास, शांति और खुशहाली की मुख्यधारा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
राष्ट्रपति ने बस्तर से आए ग्रामीणों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और युवाओं से बेहद आत्मीय माहौल में संवाद किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज और विशेषकर युवाओं में आया यह सकारात्मक बदलाव इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का प्रकाश अब राज्य के सुदूर और अंदरूनी क्षेत्रों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँच रहा है।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ा बस्तर
डीडी न्यूज़ के आधिकारिक संदर्भ के अनुसार बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे इस शिष्टमंडल ने राष्ट्रपति को इलाके की वर्तमान स्थिति, बस्तर में बुनियादी ढांचे के विस्तार और स्थानीय कला-संस्कृति के संरक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा और निरंतर प्रयासों का ही नतीजा है कि बस्तर में सुरक्षा वातावरण में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।
“जब किसी क्षेत्र से डर और हिंसा का साया हटता है, तो वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर खुद-ब-खुद फलने-फूलने लगते हैं। बस्तर के युवाओं का बंदूक छोड़ कलम और खेल की ओर बढ़ना देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।”
— द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रपति (प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान)
सड़क, डिजिटल कनेक्टिविटी और पीएम-जनमन योजना का असर
विराट भारत ब्यूरो के विश्लेषण के अनुसार बस्तर में आया यह बदलाव रातों-रात नहीं हुआ है। इसके पीछे तीन मुख्य प्रशासनिक और सुरक्षा रणनीतियों का योगदान रहा है:
- सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी: बस्तर के सुदूर जंगलों में नए सुरक्षा कैंपों (Security Camps) की स्थापना के साथ ही पक्की सड़कों और मोबाइल टावरों का निर्माण तेज हुआ है, जिसने ग्रामीणों को जिला मुख्यालयों से जोड़ा है।
- पीएम-जनमन (PM-JANMAN) योजना: विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) तक पक्के मकान, पीने का साफ पानी, बिजली और राशन की पहुँच सुनिश्चित की गई है।
- स्थानीय कला और वनोपज को पहचान: ‘वन धन विकास केंद्रों’ के माध्यम से बस्तर के महुआ, इमली और पारंपरिक हस्तशिल्प को राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा गया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
पहले भी कई दौर में बदल चुकी है स्थिति
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों में नक्सली हिंसा के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आम नागरिकों की सीधी पहुँच और देश के शीर्ष संवैधानिक प्रमुख से संवाद इस बात पर मुहर लगाता है कि बस्तर का ‘लाल गलियारा’ (Red Corridor) अब तेजी से ‘विकास गलियारे’ में बदल रहा है।
गहराई से समझें तो बस्तर में सुरक्षा और नीतिगत सुधारों का यह संगम बेहद अहम है। प्रथम नागरिक होने के नाते देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्वारा बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की अगवानी करना केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं है। यह जनजातीय आबादी में यह विश्वास जगाता है कि देश का शीर्ष नेतृत्व उनके अधिकारों, विकास और अस्मिता को लेकर पूरी तरह सजग है।
