रविवार, 23 अगस्त 2026

Pune में गरजे Rahul Gandhi: ‘मनुस्मृति के वो शब्द शर्मनाक…’, पुणे में महिलाओं की पहचान पर राहुल का बड़ा बयान

Written by: Priyanshi Rao

Published:

पुणे में 'छात्रों की गूंज' अभियान के दौरान लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मनुस्मृति के श्लोक का हवाला देकर तीखा हमला बोला। जानिए उन्होंने देश की महिलाओं और उनकी तीन बंद पहचानों को लेकर क्या कहा।


Pune में गरजे Rahul Gandhi: 'मनुस्मृति के वो शब्द शर्मनाक...', पुणे में महिलाओं की पहचान पर राहुल का बड़ा बयान
Pune में गरजे Rahul Gandhi: 'मनुस्मृति के वो शब्द शर्मनाक...', पुणे में महिलाओं की पहचान पर राहुल का बड़ा बयान
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पुणे (महाराष्ट्र): लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को महाराष्ट्र के पुणे में छात्रों की गूंज (Chhatron Ki Goonj) अभियान के मंच से महिलाओं के अधिकारों और समाज की संकीर्ण मानसिकता पर एक बड़ा वैचारिक हमला बोला है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल ने प्राचीन ग्रंथ ‘मनुस्मृति’ के एक हिस्से का सीधा हवाला दिया और महिलाओं को लेकर उसमें लिखी बातों को बेहद शर्मनाक करार दिया।

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‘बचपन में पिता, जवानी में पति… ये बातें शर्मनाक हैं’

छात्रों और युवाओं के इस बड़े जमावड़े के सामने राहुल गांधी ने मनुस्मृति की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कहा-

“मनुस्मृति कहती है कि बचपन में महिला अपने पिता की होती है, जवानी में अपने पति की होती है और जब उसका पति मर जाता है, तो वह अपने बेटों के अधीन हो जाती है। महिला को कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए।”

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राहुल ने इन शब्दों पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा –

“यह सीधे तौर पर मनुस्मृति का उद्धरण है, और ये शब्द एक शर्म की बात हैं, क्योंकि ऐसे शब्द कभी भी नहीं बोले जाने चाहिए थे।”

पुरुषों की बनाई ‘तीन डिब्बों’ वाली थ्योरी पर कसा तंज

राहुल गांधी ने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई कि हमारा आज का आधुनिक समाज भी महिलाओं को केवल सीमित दायरों में ही देखना पसंद करता है। उन्होंने पुरुषों के नजरिए पर कटाक्ष करते हुए कहा-

“जब भी मैं किसी पुरुष से बात करता हूं, तो महिलाओं को तीन डिब्बों (Boxes) में बंद कर दिया जाता है। आपको या तो एक बेटी, एक पत्नी या एक माँ के रूप में देखा जाता है। पत्नी, बेटी या माँ के रूप में देखे जाने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन केवल यही आपकी पूरी पहचान नहीं हो सकती।”

राहुल ने आगे कहा कि आज देश में ऐसी शानदार महिलाएं हैं जो खेल, कॉरपोरेट और विभिन्न प्रोफेशनल क्षेत्रों में अद्भुत काम कर रही हैं। ऐसे में पुरुषों द्वारा उन्हें केवल इन तीन पारंपरिक रिश्तों के चश्मे से देखना उनकी असली काबिलियत और पहचान को सीमित करना है।

सेना या अर्थव्यवस्था नहीं, 70 करोड़ महिलाओं के सपने हैं असली ताकत

देश की सबसे बड़ी ताकत के सवाल पर अपना दृष्टिकोण रखते हुए कांग्रेस नेता ने कहा –

“अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है? कोई कहेगा हमारी अर्थव्यवस्था, कोई सेना तो कोई मेडिकल सिस्टम को ताकत बताएगा। लेकिन मेरा नज़रिया एकदम साफ है। भारत की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी संपत्ति इस देश की 70 करोड़ महिलाओं की अनोखी यात्राएं, उनकी कल्पनाएं और उनके वो सपने हैं जिन्हें वे हर रोज जी रही हैं।”

क्या है ‘छात्रों की गूंज’ अभियान?

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने साल 2026 के मध्य में देश के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं की आवाज उठाने के लिए इस देशव्यापी राजनीतिक अभियान ‘छात्रों की गूंज’ की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में पेपर लीक (Paper Leaks), परीक्षा में अनियमितताओं, बढ़ती फीस, उच्च शिक्षा के निजीकरण और सरकारी भर्तियों में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ एक राष्ट्रीय मंच तैयार करना है। पुणे से पहले राहुल इस अभियान के तहत कोटा, देहरादून और प्रयागराज में भी युवाओं से संवाद कर चुके हैं।

Priyanshi Rao
लेखक के बारे में Priyanshi Rao

प्रियांशी यादव 'विराट भारत न्यूज़' में वरिष्ठ राजनीति एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों की विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों, संसदीय कार्यवाहियों और वैश्विक कूटनीति पर पैनी नज़र रखती हैं। उनके विश्लेषणात्मक लेख पाठकों को जटिल राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की सरल समझ प्रदान करते हैं। View all posts by Priyanshi Rao →

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