चंडीगढ़/हिसार (मौसम डेस्क): हरियाणा के मैदानी इलाकों में पिछले कुछ दिनों से जारी उमस भरी चिपचिपी गर्मी का दौर अब पूरी तरह खत्म होने जा रहा है। India Meteorological Department (IMD) ने मंगलवार 7 जुलाई 2026 को सुबह की ताज़ा रिपोर्ट जारी करते हुए प्रदेश भर में मानसूनी हवाओं के अत्यधिक मजबूत होने की पुष्टि की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की मुख्य ट्रफ रेखा इस समय हरियाणा के ऊपर से गुजर रही है, जिसके चलते आज से लेकर आगामी 3 दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश की गतिविधियां रिकॉर्ड की जाएंगी।
अंबाला से गुरुग्राम तक छाए घने काले बादल, 60 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार आज सुबह से ही अंबाला, करनाल, पानीपत, रोहतक और साइबर सिटी गुरुग्राम समेत कई जिलों में आसमान पूरी तरह बादलों से ढक गया है।
Times of India की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के आपसी टकराव के कारण दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है जिसके झोंके बीच-बीच में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार को छू सकते हैं।
इस दौरान उत्तरी हरियाणा (पंचकूला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र) और दक्षिणी हरियाणा (महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, पलवल) के क्षेत्रों में 7 सेंटीमीटर या उससे अधिक की भारी वर्षा दर्ज होने का अनुमान है।
प्रशासन ने जारी की वाटरलॉगिंग और Slippery Roads की गंभीर चेतावनी
लगातार होने वाली इस संभावित मूसलाधार बारिश के मद्देनज़र स्थानीय जिला प्रशासनों और बिजली निगमों को हाई-अलर्ट पर रख दिया गया है। The Indian Express की वेदर गाइडलाइन के अनुसार, आईएमडी ने शहरी और निचले रिहायशी इलाकों में गंभीर जलभराव (Waterlogging), ट्रैफिक जाम और सड़कों पर फिसलन (Slippery Roads) के कारण दृश्यता कम होने की चेतावनी दी है।
वाहन चालकों को विशेष रूप से हिदायत दी गई है कि वे हाईवे पर सफर करते समय गाड़ियों की रफ्तार धीमी रखें और आंधी-तूफान के समय किसी भी सूरत में कमजोर ढांचों, होर्डिंग्स या बड़े पेड़ों के नीचे अपनी गाड़ियाँ खड़ी न करें।
अन्नदाताओं के लिए संजीवनी बनी बारिश, कृषि विभाग ने दी ये विशेष सलाह
यह मानसूनी बारिश हरियाणा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और धान की रोपाई कर रहे किसानों के लिए अमृत के समान मानी जा रही है, क्योंकि इससे फसलों की सिंचाई का भारी खर्च बच जाएगा। हालांकि कृषि विशेषज्ञों ने खुले आसमान के नीचे रखे अनाज और कटी हुई फसलों को सुरक्षित गोदामों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग ने कड़े शब्दों में एडवाइजरी जारी की है कि बारिश और गरज-चमक के स्पेल के दौरान किसान खेतों में किसी भी प्रकार के यूरिया, खाद या कीटनाशक दवाओं (Pesticides) का छिड़काव पूरी तरह से टाल दें, क्योंकि पानी के बहाव के कारण दवाइयां बह जाएंगी और उनका कोई असर फसलों पर नहीं होगा।
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