चंडीगढ़/रोहतक (समाचार डेस्क): हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए राशन डिपुओं से अनाज वितरण के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

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यह नया नियम विशेष रूप से उन लाखों लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्हें हर महीने राशन डिपो पर जाकर केवल इसलिए बिना अनाज के लौटना पड़ता था क्योंकि बायोमेट्रिक मशीन पर उनके फिंगरप्रिंट मैच नहीं होते थे। 

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के महानिदेशक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब राज्य के सभी सरकारी राशन डिपुओं पर वन-टाइम पासवर्ड (OTP) और आईरिस (आंखों की पुतली) स्कैनर के जरिए राशन देने की वैकल्पिक व्यवस्था को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है।

अंगूठे के निशान की समस्या से बुजुर्गों को मिलेगी बड़ी राहत

विराट भारत की यूटिलिटी डेस्क प्रमुख सलोनी यादव की रिपोर्ट के अनुसार, खेती-किसानी और मजदूरी करने वाले लोगों तथा बुजुर्गों के हाथों की रेखाएं अक्सर समय के साथ धुंधली हो जाती हैं, जिससे मशीनों में तकनीकी दिक्कत आती थी।

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विभाग को पूरे हरियाणा से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि डिपो होल्डर फिंगरप्रिंट न मिलने का बहाना बनाकर गरीबों का राशन डकार जाते हैं या उन्हें कई-कई दिनों तक चक्कर कटवाते हैं। इसी समस्या का स्थाई समाधान ढूंढते हुए अब सभी डिपुओं पर आईरिस स्कैनर डिवाइस लगाने के आदेश दिए गए हैं। 

अब यदि किसी उपभोक्ता का अंगूठा मशीन पर स्वीकार नहीं होता है, तो डिपो होल्डर उसकी आंखों को स्कैन करके या उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजकर उसकी पहचान को सत्यापित करेगा और उसे तुरंत गेहूं, तेल व चीनी आवंटित कर दी जाएगी। 

राशन कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक होना बेहद ज़रूरी

इस नई डिजिटल व्यवस्था का सुचारू रूप से लाभ उठाने के लिए सरकार ने उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है। (छोटा पैराग्राफ)
लाभार्थियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी फैमिली आईडी (परिवार पहचान पत्र) और राशन कार्ड में उनका चालू मोबाइल नंबर ही दर्ज हो। 

यदि नंबर बंद हो चुका है या बदल गया है तो उसे तुरंत अपने नजदीकी सीएससी (CSC) केंद्र पर जाकर अपडेट करवा लें क्योंकि बिना ओटीपी या आधार लिंक मोबाइल के इस वैकल्पिक सुविधा का लाभ उठाना मुश्किल होगा। 

विभाग ने सभी जिला नियंत्रकों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के डिपो होल्डरों की औचक चेकिंग करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी डिपो संचालक इस नई व्यवस्था को लागू करने में कोताही नहीं बरत रहा है।