पंचकूला/चंडीगढ़ (यूटिलिटी डेस्क): देश की आगामी महाजनगणना को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में आज से एक बहुत बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। भारत सरकार के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय के निर्देश पर हरियाणा के चुनिंदा जिलों में सोमवार 6 जुलाई 2026 से जनसंख्या गणना का प्री-टेस्ट (Pre-Test) आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया है।
इस 12 दिवसीय विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य आगामी जनगणना से पहले तकनीकी प्रणालियों और मोबाइल एप्लिकेशंस की जमीनी व्यवहारिकता को परखना है।
चुनिंदा गांवों और वॉर्डों में 18 जुलाई तक घर-घर जाएगी टीम
विराट भारत की यूटिलिटी डेस्क प्रमुख सलोनी यादव की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह फील्ड अभ्यास पूरे प्रदेश में एक साथ न होकर केवल चयनित ब्लॉक, वॉर्ड और ग्रामीण क्षेत्रों में ही चलाया जा रहा है। 6 जुलाई से लेकर 18 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस मॉक सर्वे के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और राजस्व विभाग के स्थानीय कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर मैदान में उतारा गया है।
ये प्रगणक (Enumerators) सीधे नागरिकों के घरों पर दस्तक दे रहे हैं और उनसे परिवार के सदस्यों, बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक स्थिति से जुड़े कुछ तयशुदा सवाल पूछकर डेटा कलेक्ट कर रहे हैं।
पहली बार पूरी तरह पेपरलेस होगी गणना, मोबाइल ऐप से दर्ज होगा डेटा
इस बार की जनगणना का सबसे बड़ा यूनीक फैक्टर यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पेपरलेस (कागज रहित) होने जा रही है। कर्मचारियों को एक विशेष रूप से डिजाइन किया गया डिजिटल सेंसस पोर्टल और मोबाइल ऐप प्रदान किया गया है जिसमें डेटा भरते ही वह सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाता है।
आज सुबह जब रोहतक और पंचकूला के कुछ वॉर्डों में यह सर्वे शुरू हुआ, तो शुरुआत में मोबाइल नेटवर्क और सर्वर धीमा होने के कारण प्रगणकों को कुछ तकनीकी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा, जिसे तकनीकी टीम ने दोपहर तक दुरुस्त कर लिया।
प्रशासन ने नागरिकों से की सहयोग की अपील, सुरक्षा का दिया भरोसा
चंडीगढ़ स्थित जनगणना संचालन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने घर आने वाले अधिकृत सरकारी कर्मचारियों को सही और सटीक जानकारी देकर इस राष्ट्रीय कार्य में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें।
प्रशासन ने सुरक्षा और प्राइवेसी का पुख्ता भरोसा देते हुए स्पष्ट किया है कि इस प्री-टेस्ट के दौरान एकत्र किया जाने वाला पूरा डेटा पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग और कर्मचारियों के अभ्यास के लिए ही किया जा रहा है ताकि मुख्य जनगणना के समय कोई बड़ी तकनीकी गड़बड़ी सामने न आए।
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