शनिवार, 1 अगस्त 2026

हरियाणा फसल बीमा: किसानों के पास आज आख़िरी मौका, कटाई के बाद भी मिलेगा कवर

Written by: Dharmendra Acharya

Published:

हरियाणा में PM फसल बीमा योजना खरीफ-2026 से लागू। खरीफ पंजीकरण की अंतिम तारीख़ आज 31 जुलाई। अब कटाई के 14 दिन बाद तक फसल पर बीमा सुरक्षा, देरी पर कंपनी को देना होगा 12% ब्याज।


हरियाणा फसल बीमा: किसानों के पास आज आख़िरी मौका, कटाई के बाद भी मिलेगा कवर
हरियाणा फसल बीमा: किसानों के पास आज आख़िरी मौका, कटाई के बाद भी मिलेगा कवर
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खेत में महीनों पसीना बहाने के बाद अगर एक बेमौसम बारिश या ओले सब बहा ले जाएँ तो कैसा होगा बताओ। किसान की पुरे साल भर की म्हणत पानी में चली जाती है और यही किसान का सबसे बड़ा डर है।

हरियाणा सरकार ने इसी डर का जवाब देने की कोशिश की है। और साथ ही आज 31 जुलाई को खरीफ फसलों के बीमा पंजीकरण की आख़िरी तारीख़ भी है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को खरीफ-2026 से रबी-2026-27 तक लागू कर दिया है।

इस बार का सबसे अहम बदलाव यह है कि सुरक्षा अब खेत में खड़ी फसल तक सीमित नहीं रही। आपको बता दें की कटाई के बाद सूखने के लिए खेत में छोड़ी गई फसल को भी अब 14 दिन तक बीमा कवच मिलेगा। अगर इन दो हफ़्तों में बेमौसम बारिश, चक्रवाती वर्षा या ओलावृष्टि से नुकसान हुआ, तो किसान पूरे दावे का हक़दार होगा।

किन फसलों पर, कब तक मौका

खरीफ सीज़न में धान, बाजरा, मक्का, कपास और मूंग शामिल हैं। इनके पंजीकरण की अंतिम तिथि आज 31 जुलाई है। रबी सीज़न की गेहूं, जौ, चना, सरसों और सूरजमुखी के लिए यह समय 31 दिसंबर तक रहेगा।

योजना का लाभ तभी मिलेगा जब किसान नुकसान के 72 घंटे के भीतर सूचना दे। इसके लिए तीन रास्ते हैं, कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर 14447, या ‘क्रॉप लॉस मोबाइल ऐप’। यही 72 घंटे वाली शर्त अक्सर वह जगह है जहाँ किसान चूक जाते हैं और दावा अटक जाता है।

प्रीमियम कितना, बीमा कितना

किसान पर बोझ कम रखा गया है। खरीफ फसलों पर सिर्फ़ 2%, रबी पर 1.5% और कपास पर 5% प्रीमियम देना होगा। बाकी हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार बराबर उठाएँगे। प्रति हेक्टेयर बीमा राशि भी तय है, धान पर 1.11 लाख, कपास पर 1.14 लाख, गेहूं पर 84,386 और सरसों पर 56,639 रुपये।

देरी हुई तो कंपनी भरेगी ब्याज

किसानों के पक्ष में एक और सख़्त नियम है। अगर बीमा कंपनी तय समय में दावा नहीं निपटाती, तो उसे किसान को 12% सालाना ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।

इस बार गेहूं और धान की उपज का आकलन तकनीक-आधारित प्रणाली से होगा। बाकी फसलों के लिए पारंपरिक क्रॉप कटिंग प्रयोग जारी रहेंगे। इसके लिए हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (HARSAC) को तकनीकी साझेदार बनाया गया है, ताकि दावों का निपटान तेज़ हो।

Dharmendra Acharya
लेखक के बारे में Dharmendra Acharya

धर्मेंद्र आचार्य 'विराट भारत न्यूज़' में मुख्य कृषि एवं मौसम संपादक हैं। वे आधुनिक कृषि तकनीकों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy), मौसम विज्ञान, फसलों के वैज्ञानिक प्रबंधन और मंडियों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सटीक रिपोर्टिंग करते हैं। वे भारतीय किसानों और ग्रामीण भारत की आवाज़ को मजबूती से उठाते हैं। View all posts by Dharmendra Acharya →

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