CBSE Exam से वंचित छात्रों की बड़ी जीत: हाईकोर्ट के फैसले ने बचा लिया साल, अब हरियाणा बोर्ड से देंगे परीक्षा!

स्कूल की लापरवाही से सीबीएसई 10वीं परीक्षा से वंचित रहे छात्रों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने 9 छात्रों को हरियाणा बोर्ड से परीक्षा देने की अनुमति दी, जिससे उनका साल बर्बाद होने से बच गया। आज से शुरू हो रही परीक्षाओं में छात्र होंगे शामिल।

Virat Bharat
Virat Bharat Verified Public Figure • 25 Feb, 2026 मुख्य संपादक
Feb 26, 2026 • 9:19 AM
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CBSE Exam से वंचित छात्रों की बड़ी जीत: हाईकोर्ट के फैसले ने बचा लिया साल, अब हरियाणा बोर्ड से देंगे परीक्षा!
CBSE Exam से वंचित छात्रों की बड़ी जीत: हाईकोर्ट के फैसले ने बचा लिया साल, अब हरियाणा बोर्ड से देंगे परीक्षा!

चंडीगढ़/भिवानी: ​शिक्षा व्यवस्था की पेचीदगियों और स्कूलों की लापरवाही के बीच फंसे छात्रों के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट एक रक्षक बनकर उभरा है। संबद्धता (Affiliation) के विवाद में फंसकर अपना भविष्य अंधकार में देख रहे 10वीं के छात्रों को अदालत ने वो संजीवनी दे दी है, जिसकी उम्मीद लगभग टूट चुकी थी। ​

ये मामला केवल एडमिट कार्ड न मिलने का नहीं था, बल्कि उन मासूम सपनों का था जो स्कूल की एक प्रशासनिक चूक की वजह से दांव पर लगे थे। सीबीएसई की परीक्षा से वंचित रह गए 11 में से 9 छात्रों को अब हरियाणा बोर्ड (HBSE) की परीक्षा में बैठने की विशेष अनुमति मिल गई है। 

​क्या है पूरा मामला? 

दरअसल, स्कूल की ओर से एडमिट कार्ड जारी न किए जाने के कारण ये छात्र सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे। परीक्षा का समय नजदीक आता देख और स्कूल की ओर से कोई ठोस समाधान न मिलता देख, अभिभावकों ने हार नहीं मानी। 19 फरवरी को यह मामला हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुंचा। ​

अदालत ने स्थिति की गंभीरता और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक बीच का रास्ता निकाला। अंतरिम राहत के तौर पर कोर्ट ने आदेश दिया कि इन छात्रों को हरियाणा बोर्ड के तहत परीक्षा में शामिल कराया जाए, ताकि उनका पूरा साल बर्बाद न हो।

​आज से बदल गई किस्मत

कोर्ट के इस फैसले के बाद, ये छात्र आज से शुरू हो रही हरियाणा बोर्ड की परीक्षाओं में बैठ सकेंगे। यह न केवल एक कानूनी जीत है, बल्कि उन परिवारों के लिए एक भावुक पल भी है जो पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। ​

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन निजी स्कूलों के लिए भी एक चेतावनी है जो संबद्धता के नियमों को ताक पर रखकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं।

फिलहाल छात्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अचानक बदले हुए बोर्ड पैटर्न में खुद को ढालने की होगी, लेकिन परीक्षा में बैठने का मौका मिलना ही अपने आप में एक बड़ी राहत है।

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