Sri Lanka vs New Zealand: क्यों श्रीलंकाई फैंस अपनी ही टीम को कह रहे 'Toxic'? खेत्तारामा में टूटा वफ़ादारी का दम!

श्रीलंकाई क्रिकेट और उसके प्रशंसकों के बीच का रिश्ता अब एक 'टॉक्सिक' मोड़ पर है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेत्तारामा में मिली करारी हार ने टीम की खामियों और फैंस के गिरते मनोबल को उजागर कर दिया है। जानिए क्यों अब जीत से ज्यादा तंज सुनाई दे रहे हैं।

Virat Bharat
Virat Bharat Verified Public Figure • 25 Feb, 2026 मुख्य संपादक
Feb 26, 2026 • 11:37 AM
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Sri Lanka vs New Zealand: क्यों श्रीलंकाई फैंस अपनी ही टीम को कह रहे 'Toxic'? खेत्तारामा में टूटा वफ़ादारी का दम!
Sri Lanka vs New Zealand: क्यों श्रीलंकाई फैंस अपनी ही टीम को कह रहे 'Toxic'? खेत्तारामा में टूटा वफ़ादारी का दम! (फोटो साभार सोशल मीडिया एक्स)

कोलंबो (खेत्तारामा): क्रिकेट के मैदान पर जब 12वां खिलाड़ी (12th man) यानी दर्शक पूरी शिद्दत से साथ दें, तो हार का दर्द और गहरा हो जाता है। खेत्तारामा स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले से तीन घंटे पहले ही किलोमीटर लंबी कतारें इस उम्मीद में लगी थीं कि शायद आज कुछ बदलेगा। नीला और पीला समंदर बन चुका यह मैदान चीख-चीख कर अपनी टीम का हौसला बढ़ा रहा था, लेकिन अंत में जो हाथ लगा, वह सिर्फ 'गैलोस ह्यूमर' (Gallows humour - विपत्ति में मजाक) और सन्नाटा था।

शुरुआती जोश और फिर वही पुरानी कहानी

मैच की शुरुआत किसी सपने जैसी थी। रचिन रवींद्र और डेरिल मिचेल जैसे दिग्गजों को श्रीलंकाई गेंदबाजों ने अपनी फिरकी और रफ्तार के जाल में फंसाया। दुष्मंथा चमीरा की 145 किमी/घंटा की रफ्तार वाली गेंदों ने कीवी बल्लेबाजों के होश उड़ा दिए थे। महीश तीक्ष्णा ने एक आसान कैच छोड़ा, तो अगले ही पल एक हैरतअंगेज डाइव लगाकर अपनी गलती सुधार ली। ऐसा लग रहा था कि आज खेत्तारामा की ऊर्जा कुछ बड़ा करने वाली है।

अंतिम 4 ओवर और 'क्रिकेटिया हारा-किरी'

श्रीलंकाई क्रिकेट की सबसे बड़ी त्रासदी उसकी निरंतरता (Consistency) की कमी है। आखिरी 4 ओवरों में 70 रन लुटाना और फिर बल्लेबाजी के दौरान पावरप्ले (Powerplay) में ही घुटने टेक देना, किसी आत्मघाती कदम यानी 'हारा-किरी' (Hara-kiri) से कम नहीं था। जैसे ही स्कोर 20 पर 2 हुआ, स्टेडियम का माहौल बदल गया। जो दर्शक पहले अपनी टीम के लिए चिल्ला रहे थे, वे तंज कसते हुए "न्यूजीलैंड-न्यूजीलैंड" के नारे लगाने लगे।

एक 'टॉक्सिक' शादी जैसा रिश्ता

प्रशंसकों के बीच एक चुटकुला मशहूर है कि इस टीम के साथ उनका रिश्ता 'टॉक्सिक' (Toxic - जहरीला या नुकसानदेह) हो चुका है। यह एक ऐसी बेजान शादी की तरह है जहां प्यार खत्म हो चुका है, लेकिन लोग सिर्फ जिम्मेदारी या एक धुंधली सी उम्मीद (Flickering hope) के सहारे साथ जुड़े हुए हैं। कप्तान दासुन शनाका ने भी अपनी लाचारी जाहिर करते हुए कहा, "मेरे पास फैंस को कहने के लिए शब्द नहीं हैं, हमने उन्हें खुश होने का मौका ही नहीं दिया।"

उम्मीद की किरणें या सिर्फ छलावा?

पथम निसांका का शतक, कामिन्दु मेंडिस की काबिलियत और कुसल मेंडिस की फिफ्टी जैसे पल बताते हैं कि टीम में टैलेंट की कमी नहीं है। लेकिन एशिया कप 2022 की जीत अब एक धुंधली याद (Distant memory) बन चुकी है। लगातार तीन ग्लोबल टूर्नामेंट्स में खराब प्रदर्शन ने प्रशंसकों के धैर्य की परीक्षा ली है। अब शायद वक्त आ गया है कि फैंस और खिलाड़ी दोनों अपनी उम्मीदों को थोड़ा कम करें, क्योंकि श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए फिलहाल बड़े चमत्कार (Grand gestures) दूर की कौड़ी नजर आ रहे हैं।

Frequently Asked Questions 5

लगातार खराब बल्लेबाजी प्रदर्शन और जीती हुई बाजी हारने की वजह से फैंस निराश थे, जिसे उन्होंने व्यंग्यात्मक नारों के जरिए व्यक्त किया।

महीश तीक्षणा ने शानदार स्पेल डाला और दुष्मंथा चमीरा ने 145 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी कर सुर्खियां बटोरीं।

शनाका ने स्वीकार किया कि खिलाड़ी प्रशंसकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं और इस हार के लिए उन्होंने माफी मांगी।

लगातार खराब प्रदर्शन के कारण श्रीलंका की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उनके लिए आगे की राह काफी मुश्किल हो गई है।

डेथ ओवरों (death overs) में 70 रन लुटाना और शुरुआती पावरप्ले में विकेट खोना हार की सबसे बड़ी वजह बनी।
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