दिल्ली-रेवाड़ी पैसेंजर ट्रेन मर्डर केस का खुलासा: जुए के चक्कर में दोस्त ने ही ली जान, 2 गिरफ्तार
दिल्ली-रेवाड़ी पैसेंजर ट्रेन के शौचालय में मिले करण सिंह के शव मामले को जीआरपी ने सुलझा लिया है। जुए की रंजिश में रंजीत और विनोद ने साथियों के साथ मिलकर हत्या की थी। पुलिस ने दो को गिरफ्तार कर लिया है।
नई दिल्ली/रेवाड़ी: चलती ट्रेन, बंद शौचालय और भीतर बिखरा खून - दिल्ली से रेवाड़ी आने वाली पैसेंजर ट्रेन (54401) में हुई सनसनीखेज हत्या की गुत्थी को जीआरपी (GRP) ने सुलझा लिया है। यह महज एक हत्या नहीं, बल्कि धोखे और पुराने विवाद (Dispute) की खौफनाक दास्तां है।
पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है, जिन्होंने कबूला कि कैसे एक मामूली रंजिश ने जानलेवा मोड़ ले लिया।
दोस्ती के भेष में मौत का जाल
गाजियाबाद के नंदग्राम का रहने वाला करण सिंह 9 फरवरी को अपने दोस्त रंजीत के साथ घर से निकला था। उसे अंदाजा भी नहीं था कि जिसे वह अपना साथी समझ रहा है, वही उसकी मौत की पटकथा (Script) लिख चुका है।
जांच में सामने आया कि रंजीत और करण के बीच जुए (Gambling) को लेकर पुराना मनमुटाव था। इसी रंजिश का बदला लेने के लिए रंजीत ने अपने साथियों के साथ मिलकर खौफनाक साजिश रची।
शराब, साजिश और बेरहमी
पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, आरोपियों ने पहले करण को विश्वास में लिया और उसे दिल्ली से रेवाड़ी जाने वाली ट्रेन में बैठाया। सफर के दौरान उसे जमकर शराब (Alcohol) पिलाई गई।
जब करण नशे में पूरी तरह सुध-बुध खो बैठा, तो उसे रेलवे लाइन के पास ले जाकर ईंट-पत्थरों से बेरहमी से कुचला गया। आरोपियों ने उसकी पहचान मिटाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए शव को दोबारा ट्रेन के शौचालय (Lavatory) में डाल दिया और फरार हो गए।
CCTV और 'क्रिमिनल रिकॉर्ड' से खुला राज
जीआरपी थाना प्रभारी एसआई कृष्ण कुमार के नेतृत्व में टीम ने दिल्ली रेलवे स्टेशन के CCTV फुटेज खंगाले। फुटेज में करण को रंजीत और विनोद के साथ देखा गया।
पुलिस ने जाल बिछाकर गाजियाबाद के रंजीत और मथुरा के विनोद को शाहाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार (Arrested) कर लिया। पूछताछ में पता चला कि ये आरोपी केवल हत्यारे ही नहीं, बल्कि ट्रेनों में सोती हुई सवारियों का सामान चुराने वाले पेशेवर चोर भी हैं। रंजीत पर पहले भी चोरी के कई मुकदमे दर्ज हैं।
दो अब भी फरार, रिमांड की तैयारी
इस हत्याकांड में कुल चार लोग शामिल थे। रंजीत और विनोद सलाखों के पीछे हैं, लेकिन उनके दो साथी—आयान और सुरेश—अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों को अदालत (Court) में पेश कर रिमांड पर लेगी ताकि फरार अपराधियों के ठिकानों का पता लगाया जा सके और वारदात में इस्तेमाल हथियार बरामद किए जा सकें।