Haryana News: बहालगढ़ थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति को रास्ते में रोककर लोहे की रॉड से सिर पर जानलेवा हमला करने के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। सत्र न्यायाधीश जगजीत सिंह की अदालत ने मनोज और विपिन की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि इस चरण में मुख्य गवाहों की गवाही बाकी है और आरोपियों के बाहर आने पर गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका है।
यह मामला बहालगढ़ थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 16, दिनांक 19 जनवरी 2026 से संबंधित है। पुलिस ने शिकायतकर्ता सोनू के बयान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1), 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था।
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लोहे की रॉड से सिर पर वार का आरोप
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने पीड़ित को रास्ते में रोककर उसके साथ मारपीट की और लोहे की रॉड से सिर पर गंभीर वार किए। चोटों को डॉक्टरों की ओर से जानलेवा बताया गया है। मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के गांव डाहर सरधना निवासी 33 वर्षीय मनोज और बागपत जिले के बावली निवासी 32 वर्षीय विपिन को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल जेल में बंद हैं।
बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और बरामदगी पर उठाए सवाल
आरोपियों की ओर से पेश वकील ने अदालत में उन्हें मामले में झूठा फंसाए जाने का तर्क दिया। बचाव पक्ष के अनुसार दोनों आरोपी 12 अगस्त 2026 से हिरासत में हैं। वकील ने मनोज से लोहे के पाइप की बरामदगी को भी फर्जी बताया।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि घटना 18 जनवरी 2026 की है और मामले में चालान पेश किया जा चुका है। अभी आरोप तय होना बाकी हैं, इसलिए आरोपियों को जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।
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अभियोजन ने जमानत का किया विरोध
सरकारी वकीलों ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और पीड़ित को लगी चोटें जानलेवा पाई गई हैं। उनका कहना था कि अभी आरोप तय होने हैं और मुख्य गवाहों की गवाही भी बाकी है। ऐसे में आरोपियों की रिहाई से गवाहों पर दबाव बनाने और सुनवाई को प्रभावित करने की आशंका बनी रहेगी।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद माना कि आरोप गंभीर हैं। कोर्ट के अनुसार इस चरण पर गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी है और आरोपियों को जमानत मिलने की स्थिति में गवाहों को डराने-धमकाने तथा ट्रायल को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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अपराध की प्रकृति, गंभीरता और मामले की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अदालत ने मनोज और विपिन की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।







