नई दिल्ली: दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल पर मई 2023 में शुरुआत के बाद से 30 करोड़ से अधिक विजिट दर्ज किए गए हैं। पोर्टल के जरिए नागरिक संदिग्ध कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप संदेशों की रिपोर्ट करने के साथ अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी ले सकते हैं। विभाग के अनुसार, संचार साथी से मिली सूचनाओं का इस्तेमाल दूरसंचार, बैंकिंग और कानून प्रवर्तन एजेंसियां धोखाधड़ी रोकने के लिए कर रही हैं।
विभाग के मुताबिक, संचार साथी पर नागरिकों की ओर से दी गई जानकारी को आगे जांच और कार्रवाई के लिए उपयोगी इनपुट में बदला जाता है। इसी व्यवस्था के तहत संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन की पहचान, पुनः सत्यापन और जरूरत पड़ने पर उन्हें बंद करने जैसी कार्रवाई की जाती है।
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60.96 लाख मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक
संचार साथी के आंकड़ों के अनुसार अब तक 60.96 लाख गुम या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक किए गए हैं। इनमें से 37.85 लाख हैंडसेट की ट्रेसिंग की गई, जबकि 14 लाख से अधिक मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं।
मोबाइल खोने या चोरी होने की स्थिति में नागरिक पोर्टल के माध्यम से उसे देश के दूरसंचार नेटवर्क पर ब्लॉक करा सकते हैं। विभाग के अनुसार, ब्लॉक किए गए हैंडसेट में दोबारा किसी सिम के इस्तेमाल की कोशिश होने पर उसकी ट्रेसबिलिटी तैयार होती है और संबंधित जानकारी पुलिस के साथ साझा की जाती है।
चक्षु पर 12.80 लाख शिकायतें
संचार साथी के चक्षु फीचर के जरिए संदिग्ध कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप संदेशों की शिकायत की जा सकती है। इनमें फर्जी KYC या बिल भुगतान अलर्ट, सरकारी अधिकारी या बैंक कर्मचारी बनकर की जाने वाली ठगी, निवेश, नौकरी और लोन के नाम पर भेजे जाने वाले संदिग्ध संदेश शामिल हैं।
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विभाग के अनुसार चक्षु पर संदिग्ध धोखाधड़ी वाले संचार से संबंधित 12.80 लाख शिकायतें मिलीं। इन शिकायतों के आधार पर 59.82 लाख मामलों में कार्रवाई की गई, जिसमें 50 लाख से अधिक मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए गए।
इसके अलावा नागरिकों की ओर से अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच और रिपोर्टिंग से जुड़े 4 करोड़ से अधिक अनुरोधों का समाधान किया गया है।
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वित्तीय धोखाधड़ी रोकने में भी इस्तेमाल हो रही जानकारी
दूरसंचार विभाग के अनुसार, नागरिकों से मिली जानकारी वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक यानी Financial Fraud Risk Indicator (FRI) के लिए भी महत्वपूर्ण इनपुट है। यह संभावित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मोबाइल नंबरों के बारे में जोखिम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराता है।
यह जानकारी डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, दूरसंचार कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा की जाती है। विभाग का दावा है कि FRI की मदद से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिली है।
संचार साथी प्रणाली से जुड़े 1,600 से अधिक हितधारकों को भी यह जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि विभिन्न एजेंसियां मिलकर कार्रवाई कर सकें।
अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शन भी जांच सकते हैं
पोर्टल पर नागरिक यह देख सकते हैं कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं। यदि कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे उन्होंने नहीं लिया है या अब इस्तेमाल नहीं करते, तो उसकी रिपोर्ट की जा सकती है।
इसके अलावा नया या पुराना मोबाइल खरीदने से पहले IMEI नंबर के जरिए हैंडसेट की प्रामाणिकता जांचने की सुविधा भी उपलब्ध है। भारतीय नंबर (+91) से आने वाली संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय कॉल की रिपोर्ट करने का विकल्प भी पोर्टल पर दिया गया है।
दूरसंचार विभाग ने मोबाइल उपयोगकर्ताओं से संचार साथी पोर्टल या ऐप के जरिए अपने नाम पर जारी कनेक्शनों की जांच करने और संदिग्ध कॉल या संदेशों की रिपोर्ट करने की अपील की है। विभाग के अनुसार संचार साथी मोबाइल ऐप को अब तक 2.8 करोड़ से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं।
साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने वाले लोगों को तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
संचार साथी की सेवाएं अंग्रेजी, हिंदी और 21 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध मोबाइल ऐप के जरिए भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।






