पालिताना (भावनगर): जंगल के सबसे खूंखार शिकारी के जबड़े में अगर कोई इंसान फंस जाए तो बचने की उम्मीद न के बराबर होती है। लेकिन गुजरात के भावनगर जिले से सामने आई एक सच्ची घटना ने यह साबित कर दिया कि अगर रूह कंपा देने वाले डर के बीच भी दिमाग शांत रहे तो मौत को भी मात दी जा सकती है।
पालिताना तालुका के गरजीया गांव में एक मालधारी पशुपालक जिसका नाम कालूभाई बोघाभाई गामारा है, करीब आधे घंटे तक एक आदमकद शेरनी के पंजों के नीचे दबा रहा। इस दौरान उसने जो किया वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। उसने न तो चीख-पुकार मचाई और न ही भागने की कोशिश की, बल्कि शेरनी को शांत करने के लिए उसके सिर पर धीरे-धीरे हाथ फेरता रहा।
सुबह की शुरुआत और अचानक सामने आई मौत
घटना की शुरुआत एक सामान्य सुबह की तरह हुई थी। स्थानीय मालधारी पशुपालक कालूभाई बोघाभाई गामारा अपने बाड़े में मवेशियों को चारा डाल रहे थे। इसी दौरान जंगल से भटकती हुई एक युवा शेरनी रिहायशी इलाके में दाखिल हो गई।
जैसे ही गांव के लोगों को शेरनी के आने की भनक लगी तो इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग घरों से बाहर निकल आए और लाठियों व बर्तनों से तेज शोर मचाने लगे। वन अधिकारियों के मुताबिक अचानक उमड़ी भारी भीड़ और कानों को फाड़ देने वाले शोर से शेरनी बुरी तरह घबरा (disturbed) गई। अपनी रक्षा के लिए उसने सामने खड़े परमार पर झपट्टा मार दिया और उन्हें जमीन पर पटक दिया।
30 मिनट का खौफनाक मंजर रहा
शेरनी ने कालूभाई बोघाभाई गामारा को जमीन पर दबोच लिया और अपने दोनों भारी पंजे उनके शरीर पर गड़ाकर बैठ गई। यह एक ऐसा मंजर था जिसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए।
सूझबूझ से लिया काम:
ऐसी स्थिति में आम तौर पर इंसान हड़बड़ाहट में छटपटाता है, जिससे जंगली जानवर और ज्यादा आक्रामक हो जाता है। लेकिन कालूभाई बोघाभाई गामारा ने मौत के साए में भी अविश्वसनीय धैर्य दिखाया। वे जमीन पर बिल्कुल शांत लेटे रहे और शेरनी के सिर व शरीर पर बेहद धीरे-धीरे और प्यार से हाथ फेरने लगे।
इस अद्भुत ओर अनजाने में हुए व्यवहार का असर यह हुआ कि शेरनी ने उन्हें अपना शिकार या खतरा नहीं समझा। उसने अपने नुकीले दांतों से उनकी गर्दन पर वार नहीं किया। हालांकि उसके भारी पंजों और धारदार नाखूनों से कालूभाई बोघाभाई के हाथ, पैर और गर्दन पर गहरे जख्म हो गए।
देखें वीडियो:
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ग्रामीणों के साहस से खत्म हुआ खूनी संघर्ष
एक तरफ कालूभाई बोघाभाई गामारा शेरनी से बचने की जद्दोजहद में लगे थे वहीं दूसरी तरफ गांव वालों ने एकजुट होकर मोर्चा संभाला। शेरनी का ध्यान भटकाने के लिए ग्रामीणों ने सुरक्षित दूरी से पत्थरबाजी शुरू की और योजनाबद्ध तरीके से भारी आवाजें निकालीं।
लगातार बढ़ते दबाव और शोर के बाद आखिरकार शेरनी का ध्यान भटका और वह परमार को छोड़कर वापस झाड़ियों की तरफ भाग गई। लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़े कालूभाई बोघाभाई गामारा को तुरंत पालिताना के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए भावनगर के प्रसिद्ध सर टी अस्पताल (Sir T Hospital) रेफर कर दिया गया जहां उनका इलाज जारी है।
वन विभाग की तैनाती और गहराता मैन-एनिमल कॉन्फ्लिक्ट
जैसे ही वन विभाग को इस घटना की सूचना प्राप्त हुई वैसे ही वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (RRT) ट्रैंक्विलाइजर गन (बेहोश करने वाली बंदूक) और पिंजरों के साथ गरजीया गांव पहुंच गई। इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है ताकि शेरनी को सुरक्षित पकड़कर गहरे जंगल में छोड़ा जा सके।
वन अधिकारियों का कहना है कि पालिताना और आसपास का सौराष्ट्र इलाका एशियाई शेरों (Asiatic Lions) का स्वाभाविक कॉरिडोर है। हालांकि, इंसानी बस्तियों के फैलाव और शेरों की बढ़ती आबादी के कारण ‘ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट’ (मानव-वन्यजीव संघर्ष) की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।




