शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

कपास किसान सावधान! बारिश के बाद खेत में तुरंत करें ये 6 काम, वरना तबाह हो जाएगी पूरी फसल

Written by: Dharmendra Acharya

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कृषि डेस्क/विराट भारत न्यूज: मानसून की बारिश जब जलभराव में बदल जाए तो कपास (कॉटन) के किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी हो जाती हैं। एक तरफ जहां बारिश से…


कपास में बारिश के बाद किसान रखने इन बातों का ध्यान
कपास में बारिश के बाद किसान रखने इन बातों का ध्यान। फोटो : विराट भारत न्यूज
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कृषि डेस्क/विराट भारत न्यूज: मानसून की बारिश जब जलभराव में बदल जाए तो कपास (कॉटन) के किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी हो जाती हैं। एक तरफ जहां बारिश से मिट्टी की प्यास बुझती है तो वहीं दूसरी तरफ खेत में रुका हुआ पानी और लंबे समय तक बने रहने वाले बादल फसल के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर देते हैं। कृषि विशेषज्ञों और ICAR के सलाहकारों का स्पष्ट कहना है कि बारिश बंद होते ही उठाया गया एक गलत कदम या जल्दबाजी में किया गया छिड़काव आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है।

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​दरअसल बारिश के बाद वायुमंडल और मिट्टी में बनी अत्यधिक नमी कई तरह के कवक (फंगस) और कीटों के पनपने के लिए मुफीद माहौल तैयार करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक किसान बारिश के तुरंत बाद अपने कपास के खेत को कैसे सुरक्षित रखे? आईये किसान भाइयों आज आपको कपास की फसल की इस समस्या का निवारण बताते है कि कैसे आप अपनी कपास को बारिश के बाद बचा सकते है ओर कैसे अधिक से अधिक पैदावार ले सकते है।

​जलभराव से फसल हो सकती है बर्बाद

​बारिश रुकते ही किसान का पहला काम यूरिया या कीटनाशक उठाने का नहीं बल्कि खेत की नालियों की मरम्मत का होना चाहिए लेकिन अक्सर देखने को इससे उल्टा मिलता है ओर यही किसान की सबसे बड़ी गलती होती है। यदि खेत के निचले हिस्सों में 24 से 48 घंटे तक पानी जमा रहता है तो कपास की जड़ें ऑक्सीजन की कमी से जूझने लगती हैं। इसके कारण पौधों में पेराविल्ट या अचानक मुरझाने की समस्या सामने आती है।

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​इसलिए किसान भाइयों सबसे पहले मेड़ और नालियों को तुरंत साफ करके रुके हुए अतिरिक्त पानी को खेत से बाहर निकालें। जब तक मिट्टी से अतिरिक्त नमी कम न हो तब तक कपास की जड़ों के पास किसी भी प्रकार का भारी भार या काम न बढ़ाएं।

कपास के बारिश के बाद तुरंत स्प्रे की गलती न करें

​कई किसान भाई बारिश रुकते ही दवाओं का छिड़काव करने के लिए खेत में उतर जाते हैं। मौसम सलाहकारों के अनुसार,ल यह सिर्फ पैसों और समय की बर्बादी है क्योंकि गीली पत्तियों और अस्थिर मौसम में किए गए छिड़काव का असर बहुत कम या शून्य हो जाता है।

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अपनी कपास में ​स्प्रे तभी करें जब धूप खिल जाए, पत्तियां सूख जाएं और हवा शांत हो। इसके अलावा बिना किसी विशेषज्ञ सलाह के यूरिया डालने से बचें क्योंकि इससे कपास की फसल पर फंगस का हमला और तेज हो सकता है।

​पत्तियों और बोंड (Galls) पर बारीक नजर रखनी होगी

​आसमान में बने रहने वाले बादल और उच्च आर्द्रता के कारण कपास में पत्तियों के झुलसने (Leaf Blight) और बोंड सड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए किसानों को अपने खेत में घूमकर चारों कोनों से पौधों का जायजा लेना चाहिए ओर ​अगर पत्तियों पर असामान्य धब्बे, पीलापन या पत्तियों का बेवजह गिरना दिख रहा है तो यह कवक (फंगल) संक्रमण की शुरुआत हो सकती है। यदि फूल और छोटे बोंड झड़ रहे हैं तो यह तनाव (stress) या पोषक तत्वों के असंतुलन का संकेत है। इसका निवारण करना फिर जरूरी हो जाता है।

गुलाबी सुंडी का खतरा: फेरोमोन ट्रैप से करें निगरानी

​बारिश के बाद की नमी गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) और रस चूसक कीटों के लिए सबसे अनुकूल समय मानी जाती है। ICAR-CICR के अनुसार कीट दिखते ही तुरंत भारी केमिकल स्प्रे करने के बजाय एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाएं।

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कपास में गुलाबी सुंडी
कपास के गुलाबी सुंडी। फोटो विराट भारत

किसान भाइयों अपने ​खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाएं ताकि कीटों की मौजूदगी और उनकी संख्या का सही अंदाजा लगाया जा सके। इसके अलावा जब तक कीटों की संख्या नुकसान पहुंचाने वाले स्तर (ETL) तक न पहुंचे,ल तब तक अंधाधुंध कीटनाशकों के प्रयोग से बचें।

किसान भाई बारिश के बाद ये 6 नियम ध्यान रखें

कपास के किसान भाई बारिश के बाद में नीचे दिए इन 6 नियमों को ध्यान में रखकर ही खेत में काम करें ओर अगर इस हिसाब से काम किया गया तो कपास में बारिश के बाद नुकसान को कम से कम या खत्म किया जा सकता है। देखिये –

​1. मेड़-नालियों की सफाई कर जलभराव खत्म करें।

2. मौसम पूरी तरह साफ होने तक स्प्रे को टालें।

3. खेत में घूमकर पत्तियों के नीचे और बोंड की जांच करें।

4. गुलाबी सुंडी की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल करें।

5. फूल-बोंड झड़ने पर बिना जांच यूरिया या भारी खाद न डालें।

6. कोई भी रसायन इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय कृषि अधिकारी की सलाह लें।

​किसान भाइयों एक बात का ओर भी ध्यान आपको रखना है कि हर खेत का ढलान, मिट्टी की प्रकृति और बारिश का स्तर अलग होता है। इसलिए पड़ोस के खेत की देखा-देखी दवा न छिड़कें। अपनी फसल की स्थिति देखकर ही कृषि विश्वविद्यालय या नजदीकी केवीके (KVK) के परामर्श पर कदम उठाएं या फिर अपने खेत की स्थिति के हिसाब से ही आपको कदम उठाना है।

Dharmendra Acharya
About the Author Dharmendra Acharya

धर्मेंद्र आचार्य 'विराट भारत न्यूज़' में मुख्य कृषि एवं मौसम संपादक हैं। वे आधुनिक कृषि तकनीकों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy), मौसम विज्ञान, फसलों के वैज्ञानिक प्रबंधन और मंडियों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सटीक रिपोर्टिंग करते हैं। वे भारतीय किसानों और ग्रामीण भारत की आवाज़ को मजबूती से उठाते हैं। View all posts by Dharmendra Acharya →

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