सिवानी (भिवानी): हरियाणा के भिवानी जिले से पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है। सिवानी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव नांगल के सरपंच रण सिंह को उनके पद से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। सरपंच पर यह गाज गांव में ही चल रही आशा वर्कर (ASHA Worker) की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर धांधली और अनियमितताएं बरतने के आरोपों के बाद गिरी है।
आशा वर्कर के चयन में हुआ था खेल, ग्रामीणों ने खोल दिया था मोर्चा
पूरा मामला गांव नांगल में आशा वर्कर के खाली पद को भरने के लिए आयोजित की गई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप थे कि भर्ती के दौरान नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से चयन करने का प्रयास किया गया। इसकी भनक जब ग्रामीणों को लगी, तो उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कर दी। मामला सीधे भिवानी के उपायुक्त (DC) साहिल गुप्ता के पास पहुँचा, जिन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दे दिए।
एडीसी की जांच रिपोर्ट में फंसे सरपंच, जारी हुआ था नोटिस
डीसी के निर्देश पर अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल जांच कमेटी का गठन किया गया था। इस समिति ने जब मामले की बारीकी से जांच की, तो भर्ती प्रक्रिया के भीतर सरपंच रण सिंह की भूमिका को लेकर गंभीर अनियमितताएं और कमियां पाई गईं। एडीसी कमेटी की इस रिपोर्ट के आधार पर सरपंच को पहले हरियाणा पंचायती राज अधिनियम के तहत ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर उनका पक्ष मांगा गया था। लेकिन उपलब्ध तथ्यों के सामने सरपंच की ओर से दी गई दलीलें टिक नहीं सकीं और उनके खिलाफ लगे आरोप पूरी तरह सही साबित हुए।
डीसी ने थमाया सस्पेंशन लेटर, बैठकों में जाने पर भी लगी रोक
अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद भिवानी के डीसी साहिल गुप्ता ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 51(1)(बी) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सरपंच रण सिंह को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश के मुताबिक, अब निलंबन की इस अवधि के दौरान सरपंच ग्राम पंचायत की किसी भी आधिकारिक बैठक या कार्रवाई में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
ग्राम सचिव संभालेंगे रिकॉर्ड, बहुमत वाले पंच को मिलेगा चार्ज
प्रशासन ने इस कार्रवाई को तुरंत धरातल पर लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरपंच रण सिंह के पास मौजूद पंचायत की जितनी भी चल-अचल संपत्ति, सरकारी रिकॉर्ड, चेकबुक और फंड का ब्यौरा है, उसे संबंधित ग्राम सचिव के माध्यम से नियमानुसार बहुमत रखने वाले पंच को सौंपने के आदेश जारी हो चुके हैं। इस कड़े एक्शन के बाद इलाके की अन्य ग्राम पंचायतों और सरकारी भर्तियों से जुड़े अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।




