चंडीगढ़: हरियाणा में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों (Voter List) की एक ऐसी महासफाई की है जिसने सूबे के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राज्य निर्वाचन विभाग द्वारा चलाए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के तहत तैयार ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में प्रदेश के 16.39 प्रतिशत मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। चुनाव आयोग के इस बड़े एक्शन के बाद अब उन लोगों में हड़कंप है जिन्होंने लंबे समय से अपने वोटर आईडी कार्ड को अपडेट नहीं कराया था।
पूरे देश में तीसरे नंबर पर पहुंचा हरियाणा, अरुणाचल और यूपी टॉप पर
वोटर लिस्ट से इस तरह थोक के भाव नाम काटने के मामले में हरियाणा अब पूरे देश में तीसरे पायदान पर आ खड़ा हुआ है। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इससे पहले सिर्फ अरुणाचल प्रदेश (19.09%) और उत्तर प्रदेश (18.7%) में ही इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।
औद्योगिक शहर गुरुग्राम और फरीदाबाद में हुआ सबसे बड़ा खेल
इस पूरी छंटनी का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह है कि लिस्ट से बाहर किए गए कुल वोटर्स में से अकेले 28 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा के दो बड़े औद्योगिक जिलों, गुरुग्राम और फरीदाबाद का है।
- गुरुग्राम का हाल: इस अभियान से पहले गुरुग्राम जिले में कुल 15,55,034 मतदाता रजिस्टर्ड थे जो अब घटकर महज 11,01,955 रह गए हैं। यानी सीधे 4,53,468 वोटर्स लिस्ट से साफ हो गए। सबसे तगड़ा झटका वीआईपी विधानसभा क्षेत्र बादशाहपुर’ और गुरुग्राम सीट को लगा है जहां लाखों की संख्या में वोट घटे हैं।
- फरीदाबाद का हाल: यहाँ भी लगभग 5.1 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से उड़ा दिए गए हैं जिसके बाद जिले की कुल वोटर संख्या 18.8 लाख से घटकर सीधे 13.7 लाख पर सिमट गई है।
क्यों कटे इतने नाम? जानिए इसके पीछे का असली गणित
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, हरियाणा में कुल 2,06,55,929 रजिस्टर्ड मतदाता थे। इनमें से 83.61% वोटर्स ने तो अपना गणना फॉर्म समय पर जमा करा दिया लेकिन बाकी बचे लोगों का जब ऑन-ग्राउंड वेरिफिकेशन हुआ तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं:
- पते पर नहीं मिले (11.68%): लगभग 24.13 लाख लोग ऐसे निकले जो अपने दिए गए एड्रेस पर नहीं रह रहे थे। ये या तो दूसरे शहरों में शिफ्ट हो गए थे या लंबे समय से गायब थे।
- मृत घोषित (3.71%): करीब 7.66 लाख मतदाता वेरिफिकेशन के दौरान मृत पाए गए जिनका नाम सालों से लिस्ट में चल रहा था।
- फर्जी या डबल वोटर्स (0.99%): करीब 2.04 लाख चालाक मतदाता ऐसे मिले जिनके नाम दो या उससे ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों की लिस्ट में एक साथ दर्ज थे।
अभी भी है मौका: 30 अगस्त 2026 तक सुधार लें अपनी गलती
अगर इस लिस्ट में आपका नाम भी गलती से कट गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने आम जनता को 30 अगस्त 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का आखिरी मौका दिया है। इस दौरान आप जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने पोलिंग बूथ या ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर नाम दोबारा जुड़वाने या किसी गलती को सुधारने के लिए फॉर्म भर सकते हैं। इस पूरे काम की स्क्रूटनी के लिए प्रशासन ने राज्य भर में 90 ERO और 1,601 AERO अफसरों की फौज तैनात कर दी है।




