नारनौल: शेयर बाजार (Share Market) में निवेश के नाम पर देशव्यापी नेटवर्क चला रहे साइबर अपराधियों के खिलाफ महेंद्रगढ़ जिला पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर थाना नारनौल की टीम ने सघन तकनीकी अनुसंधान (Technical Investigation) के बाद मध्य प्रदेश के इंदौर से एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है।
आरोपी की पहचान इंदौर के बेरछा निवासी सुनील के रूप में हुई है जिसने एक फर्जी इन्वेस्टमेंट फर्म का अधिकारी बनकर कनीना क्षेत्र के एक नागरिक से लाखों रुपये की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
कैसे हुआ फर्जी ट्रेडिंग का भंडाफोड़?
यह पूरी कार्रवाई कनीना उपमंडल के अंतर्गत आने वाले गांव ककराला निवासी हेमंत कुमार की लिखित शिकायत पर अमल में लाई गई है जो पेशे से एक निजी स्कूल में अध्यापक हैं। पीड़ित हेमंत के मुताबिक कुछ समय पहले उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई थी।
कॉल करने वाले ने खुद को ग्रो मोर इनवेस्टमेंट रिसर्च एंड डवलपमेंट कंपनी तथा एनएसई पोर्टफोलियो ट्रेकर का अधिकृत अधिकारी बताया था। शातिर अपराधी ने पीड़ित को घर बैठे ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए रोजाना मोटा और अवास्तविक मुनाफा कमाने का सब्जबाग दिखाया था।
फर्जी पोर्टफोलियो दिखाकर जीता था भरोसा
साइबर सेल की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए एक सोची-समझी स्क्रिप्ट पर काम किया। शुरुआत में हेमंत से एक छोटी राशि निवेश कराई गई और इसके बाद एक फर्जी डिजिटल पोर्टफोलियो पर उनका नकली लाभांश (Profit) प्रदर्शित किया गया।
जब पीड़ित को यकीन हो गया कि उसका पैसा बढ़ रहा है तो आरोपियों ने दबाव बनाकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 8 लाख 25 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए। ठगी का अहसास पीड़ित को तब हुआ जब उसने अपनी मूल राशि और कथित मुनाफा वापस निकालना चाहा, लेकिन आरोपियों ने रकम लौटाने से साफ मना कर दिया और संपर्क तोड़ लिया।
पुलिस ने जारी की जरूरी एडवायजरी
इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद महेंद्रगढ़ जिला पुलिस ने आम जनता के लिए एक विशेष वित्तीय सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे टेलीग्राम, व्हाट्सएप या अनजान कॉल पर मिलने वाले किसी भी अनवेरिफाइड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या इन्वेस्टमेंट स्कीम में अपनी गाढ़ी कमाई न लगाएं। अत्यधिक मुनाफे के लालच में आकर कभी भी अपनी निजी और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें।
यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की डिजिटल या साइबर ठगी का शिकार होता है तो वह बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करे या आधिकारिक साइबर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराए।