राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़: क्या मामूली पारिवारिक आय या बुजुर्ग माता-पिता को मिलने वाली छोटी-मोटी बुढ़ापा पेंशन आपके मेडिकल बिलों के रीइंबर्समेंट (चिकित्सा प्रतिपूर्ति) में बाधा बन रही थी? हरियाणा के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इस गंभीर तकनीकी समस्या से स्थायी निजात मिल गई है। 

राज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित प्रशासनिक सुधार करते हुए, कर्मचारियों के आश्रितों के लिए तय मासिक आय सीमा को सीधे ₹3,500 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति माह कर दिया है। इस आशय का आधिकारिक पत्र सोमवार को जारी कर दिया गया है।

दो दशक पुराने नियम में संशोधन, अड़चनें होंगी दूर

पत्रकारिता सूत्रों और सरकारी अभिलेखों के अनुसार, आश्रितों की आय की यह सीमा अंतिम बार 14 दिसंबर 2007 को तय की गई थी। पिछले 19 वर्षों में देश और प्रदेश में जीवन-यापन की लागत (Cost of Living) और चिकित्सा सेवाओं के खर्चों में कई गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

इस गंभीर विसंगति के कारण यदि किसी कर्मचारी के बुजुर्ग माता-पिता की मासिक ब्याज आय या बुढ़ापा सम्मान भत्ता भी ₹3,500 की सीमा को पार कर जाता था तो वे तकनीकी तौर पर 'आश्रित' की श्रेणी से बाहर हो जाते थे। नए आदेश के बाद अब ₹9,000 तक की व्यक्तिगत आय वाले आश्रित भी मुफ्त इलाज और मेडिकल क्लेम के पूर्ण हकदार माने जाएंगे।

वित्त विभाग की पूर्व मंजूरी और आधिकारिक आदेश संख्या

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पत्र (Endst. No. 2/144/07-1HBIII) के अनुसार, इस नीतिगत बदलाव को धरातल पर उतारने से पहले व्यापक वित्तीय समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को प्रदेश के वित्त विभाग (Finance Department) ने 26 जून 2026 को ही अपने आधिकारिक यू.ओ. नंबर 12/4/2025-IFDII/16207 के तहत अपनी प्रशासनिक व वित्तीय सहमति दे दी थी। 

वित्तीय विभाग से हरी झंडी प्राप्त होने के उपरांत स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव (Under Secretary) के हस्ताक्षरों से यह अधिसूचना जारी की गई है।

प्रशासनिक स्तर पर तत्काल प्रभाव से आदेश लागू

आदेश की कॉपियां राज्य के सभी शीर्ष प्रशासनिक और विधिक अधिकारियों को प्रेषित कर दी गई हैं, जिससे इस व्यवस्था को बिना किसी देरी के लागू किया जा सके। यह पत्र:

  • हरियाणा सरकार के सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों (Heads of Department)
  • राज्य के सभी मंडलायुक्तों (Divisional Commissioners) तथा उपायुक्तों (DC)
  • पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट, चंडीगढ़ के रजिस्ट्रार जनरल को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजा जा चुका है।

इसके साथ ही ऑडिट और वित्तीय क्लीयरेंस में किसी भी रुकावट से बचने के लिए इसकी प्रतियां अकाउंटेंट जनरल (AG) हरियाणा को भी प्रेषित की गई हैं।

कर्मचारी संगठनों के लंबे दबाव के बाद हुआ फैसला

प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों और सचिवालय संघों द्वारा लंबे समय से इस सीमा को तर्कसंगत बनाने की मांग की जा रही थी। हाल के वर्षों में 'परिवार पहचान पत्र' (PPP) और पैन कार्ड लिंक होने के कारण डेटा पूरी तरह डिजिटल हो चुका था जिससे आश्रितों की न्यूनतम बैंक ब्याज आय भी विभागों के सामने आ जाती थी और क्लेम खारिज हो रहे थे। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस एक फैसले से राज्य के करीब 4.5 लाख सेवारत कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी संचित बचत पर पड़ने वाला अस्पताल के खर्चों का बोझ बेहद कम हो जाएगा।