विराट भारत संवाददाता, रेवाड़ी: देशभर में बढ़ रहे हृदयाघात (हार्ट अटैक), उच्च रक्तचाप और सड़क हादसों के बीच क्या हमारे सार्वजनिक और निजी संस्थान किसी भी त्वरित स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए तैयार हैं? इसी गंभीर सवाल को लेकर लोक सेवा मंच ने सोमवार को रेवाड़ी में एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। 

मंच ने अपने 'मेगा मिशन जनसंपर्क अभियान' के तहत नारनौल रोड स्थित एक प्रमुख कॉलेज में नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों (नर्सिंग स्टूडेंट्स) के साथ एक विशेष बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सभी सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों में अनिवार्य रूप से मेडिकल केयर यूनिट्स (फर्स्ट एड सेंटर) स्थापित करने की मांग को मुखर करना था।

संस्थानों में प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति अनिवार्य करने पर जोर

बैठक के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान और लोक सेवा मंच की कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों—बीके राम सिंह, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल और नंदलाल यादव ने नर्सिंग के युवाओं से सीधे संवाद किया। इस चर्चा में युवाओं ने स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार कम हो रहे रोजगार के अवसरों, बढ़ती महंगाई और समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण दम तोड़ते मरीजों के आंकड़ों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

मंच के नेतृत्वकर्ता अशोक प्रधान ने तकनीकी पहलू को समझाते हुए कहा कि किसी भी मेडिकल इमरजेंसी या दुर्घटना के समय शुरुआती कुछ मिनट (गोल्डन ऑवर) सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित को मौके पर ही बुनियादी प्राथमिक उपचार मिल जाए, तो अस्पताल ले जाते समय होने वाली मौतों के ग्राफ को काफी हद तक नीचे लाया जा सकता है।

मॉल, कोर्ट, रेलवे स्टेशन और कॉलेजों को दायरे में लाने की मांग

लोक सेवा मंच ने सरकार और निजी प्रबंधन से मांग की है कि केवल अस्पतालों के भरोसे रहने के बजाय उन सभी जगहों पर बुनियादी ढांचा तैयार किया जाए जहां भारी भीड़ जुटती है। मंच ने विशेष रूप से निम्नलिखित स्थानों पर मेडिकल केयर यूनिट स्थापित करने और वहां प्रशिक्षित पैरामेडिकल या नर्सिंग स्टाफ नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है:

  1. सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविद्यालय
  2. औद्योगिक इकाइयां (फैक्ट्रियां), कारपोरेट और सरकारी कार्यालय
  3. रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और जिला न्यायालय (कोर्ट परिसर)
  4. बड़े शॉपिंग मॉल और सार्वजनिक पर्यटन स्थल

इन बीमारियों और आपात स्थितियों में जीवनरक्षक बनेगा कदम

नर्सिंग प्रशिक्षणार्थियों ने भी इस बात का समर्थन किया कि वर्तमान समय में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं। अचानक आने वाला हृदयाघात (हार्ट अटैक), उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), मधुमेह (डायबिटीज) का अचानक बढ़ना या घटना, दुर्घटना में लगने वाली गंभीर चोटें, तेज बुखार, उल्टी, दस्त और चक्कर आने जैसी आकस्मिक समस्याओं में तत्काल प्राथमिक उपचार किसी के लिए भी जीवनरक्षक साबित हो सकता है। 

युवाओं का मानना है कि यदि सरकार इस नीति को अनिवार्य करती है, तो इससे न केवल कीमती जानें बचेंगी, बल्कि नर्सिंग और पैरामेडिकल का कोर्स कर चुके हजारों बेरोजगार युवाओं को रोजगार के नए और स्थायी अवसर भी मिलेंगे।