शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

अल नीनो संकट के बीच एक्शन मोड में सरकार; कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की महाबैठक, किसानों के लिए जारी की नई गाइडलाइन

Written by: Vipin Zaildar

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देश में मानसूनी बारिश का कुल घाटा अब घटकर मात्र 24 प्रतिशत पर आया। बारिश की कमी वाले जिलों की संख्या 262 से कम होकर 178 रह गई है। देरी से प्रभावित कपास और सोयाबीन बेल्ट को जुलाई की बारिश से राहत मिली। कृषि विभाग ने कम पानी वाली बाजरा, मक्का और मूंग फसलों की भी दी सलाह।


नई दिल्ली/हिसार (कृषि ब्यूरो): भारत के करोड़ों किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए आज सुबह दिल्ली के कृषि भवन से बेहद राहत भरी और सकारात्मक खबर निकलकर सामने आ रही है। जून के महीने में अल नीनो (El Niño) के कड़े प्रभाव और 33% बारिश की भारी किल्लत झेलने के बाद जुलाई के शुरुआती दिनों में सक्रिय हुए मानसूनी सिस्टम ने पूरे देश में पासा पलट दिया है। 

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केंद्रीय कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) द्वारा बुधवार को की गई हाई-लेवल बैठक के बाद देश में खरीफ फसलों के बुआई क्षेत्र (Kharif Acreage) के आंकड़ों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संभाली कमान, 178 जिलों में संकट टला

कृषि ब्यूरो प्रमुख धर्मेंद्र आचार्य की खोजी रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में मानसून की प्रगति, बीज-खाद की उपलब्धता और बुआई के रकबे की समीक्षा के लिए एक आपातकालीन आपात बैठक की अध्यक्षता की। The Hindu की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री ने साफ किया कि देश में बारिश की कमी जो जून में चिंताजनक स्तर पर थी वह अब तेजी से सुधरकर केवल 24% पर आ गई है। अच्छी बारिश की बदौलत देश के अत्यधिक प्रभावित जिलों की सूची 262 से घटकर 178 पर आ चुकी है जिससे ग्राउंड लेवल पर स्थिति तेजी से नियंत्रण में आ रही है।

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कपास और सोयाबीन की बुआई में आई तेजी, शॉर्ट-ड्यूरेशन बीजों पर जोर

इस साल मानसून की शुरुआती सुस्ती के कारण पूरे देश में खरीफ की फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले लगभग 20.78% पिछड़ गई थी। विशेष रूप से हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश की मुख्य नकदी फसलें जैसे सोयाबीन और कपास (नरमा) सबसे ज्यादा प्रभावित थीं। 

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The Economic Times के ताजा आंकड़ों के अनुसार संकट को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने उन क्षेत्रों के किसानों को विशेष रूप से सलाह दी है जहां पानी की उपलब्धता अब भी सीमित है वे लंबी अवधि की फसलों के बजाय कम समय में पकने वाली (Short-duration) मक्का, बाजरा, ग्वार और मूंग की बिजाई को प्राथमिकता दें ताकि मौसम की अनिश्चितता से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में अगले 3 दिन ऐतिहासिक, युद्धस्तर पर होगी धान रोपाई

बैठक में मौसम विज्ञानियों द्वारा साझा किए गए इनपुट के आधार पर कृषि मंत्रालय ने एक बहुत बड़ा दावा किया है। आने वाले अगले 72 घंटों के भीतर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के अधिकांश हिस्सों में मानसून का एक अत्यधिक मजबूत और सक्रिय दौर शुरू होने वाला है। इस मानसूनी रिकवरी के कारण उत्तर भारत के धान (जीरी) उत्पादक बेल्ट में पानी की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी जिससे धान की रोपाई की रफ्तार अपने रिकॉर्ड स्तर को छू लेगी। सरकार ने सभी राज्यों को सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया और डीएपी (DAP) खादों का बफर स्टॉक अग्रिम रूप से खेतों के पास पहुंचाने के सख्त निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

Vipin Zaildar
About the Author Vipin Zaildar

विपिन जैलदार 'विराट भारत न्यूज़' के मुख्य विशेष संवाददाता हैं। वे खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism), अपराध जगत (Crime Reporting), SOG एवं STF की विशेष कार्रवाइयों और हरियाणा व राजस्थान के क्षेत्रीय एवं जमीनी मुद्दों को गहराई से कवर करने में माहिर हैं। वे अपनी निडर और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। View all posts by Vipin Zaildar →

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