Agricultural Drone: भारतीय कृषि (Indian Agriculture) का परिदृश्य अब तेजी से हाई-टेक होने जा रहा है। पारंपरिक रूप से पीठ पर भारी-भरकम टैंक लादकर खेतों में घंटो कीटनाशक छिड़कने के दिन अब हवा होने वाले हैं। देश के प्रगतिशील किसान अब कृषि ड्रोन (Agricultural Drones) का इस्तेमाल कर न सिर्फ अपना समय और पैसा बचा रहे हैं बल्कि अपनी सेहत को भी जहरीले रसायनों से सुरक्षित रख रहे हैं। भारत सरकार भी सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) और नमो ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं के जरिए देश के गांवों तक इस तकनीक को पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये की सब्सिडी बांट रही है।
विराट भारत के इस आर्टिकल में आइये जानते है की ड्रोन आखिर कैसे काम करते है और इस तकनीक का इस्तेमाल सभी किसान भाई अपने खेतो में कैसे कर सकते है। इसके अलावा किसान भाईओं को इसमें सरकार की तरफ से क्या क्या मदद मिलती है इसकी भी जानकारी आपको इस आर्टिकल में देते है।
10 मिनट में 1 एकड़ खेत का छिड़काव (How it works?)
आमतौर पर एक मजदूर को पीठ पर मैन्युअल पंप टांगकर 1 एकड़ खेत में कीटनाशक या लिक्विड यूरिया का छिड़काव करने में कम से कम 3 से 4 घंटे का समय लगता है। इसके अलावा दवा का छिड़काव एक समान नहीं हो पाता और पानी भी 150 से 200 लीटर तक बर्बाद होता है। इससे समय की बर्बादी के साथ साथ में जो किसान खेत में छिड़काव कर रहा है उसकी सेहत भी ख़राब होती है। ड्रोन का इस्तेमाल करने पर ये सब नहीं होता है।
ड्रोन का खेती में इस्तेमाल करने से समय की बचत भी होती है। कृषि ड्रोन में लगे एडवांस सेंसर और हाई-स्पीड नोजल मात्र 10 से 12 मिनट में पूरे 1 एकड़ खेत पर दवा का छिड़काव कर देते हैं। इसके अलावा जहां साधारण स्प्रे में 200 लीटर पानी लगता है वहीं ड्रोन तकनीक सिर्फ 10 लीटर पानी में पूरी दवा को भाप (Mist) के रूप में एक समान तरीके से हर पत्ती तक पहुंचा देती है। ड्रोन जीपीएस (GPS) तकनीक से लैस होते हैं। यह खेत के एक-एक कोने को मैप करके छिड़काव करता है जिससे फसल का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं रहता और दवा की बर्बादी नहीं होती।
ड्रोन पर सरकारी सब्सिडी भी मिलती है (Government Subsidy Structure)
भारत सरकार कृषि ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग श्रेणियों में 40% से लेकर 100% तक की भारी सब्सिडी दे रही है:
- 100% सब्सिडी (मुफ्त ड्रोन – ₹10 लाख तक): यह लाभ कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और सरकारी किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मिलता है, ताकि वे किसानों को मुफ्त में इसका लाइव डेमो दिखा सकें।
- 75% सब्सिडी (₹7.5 लाख तक): यदि किसानों का कोई मान्यता प्राप्त समूह या सहकारी समिति ड्रोन खरीदती है, तो उन्हें 75 फीसदी तक की छूट मिलती है।
- 50% सब्सिडी (₹5 लाख तक): देश के छोटे और सीमांत किसान, महिला किसान और उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसान यदि व्यक्तिगत रूप से ड्रोन खरीदना चाहते हैं, तो उन्हें लागत का 50% या अधिकतम 5 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाती है।
- 40% सब्सिडी (₹4 लाख तक): अन्य सभी सामान्य वर्ग के व्यक्तिगत किसानों को सरकार की तरफ से 40% की वित्तीय सहायता दी जाती है।
ड्रोन चलाने के लिए क्या लाइसेंस जरूरी है? (The Rule)
आप बाजार से ड्रोन खरीदकर सीधे खेत में नहीं उड़ा सकते। इसके लिए डीजीसीए (DGCA) के कड़े नियम हैं और इन नियमों के तहत ही आपको खेतों में ड्रोन का इस्तेमाल करना होता है। इसके लिए ड्रोन उड़ाने वाले व्यक्ति के पास रिमोट पायलट लाइसेंस (Remote Pilot License) होना अनिवार्य है। सरकार विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों और सीएससी (CSC) सेंटर्स के माध्यम से किसानों और ग्रामीण युवाओं को 5 से 7 दिनों की मुफ्त या बेहद रियायती दरों पर ट्रेनिंग दे रही है।
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद डीजीसीए द्वारा बकायदा लाइसेंस जारी किया जाता है। ग्रामीण युवा यह ट्रेनिंग लेकर और ड्रोन खरीदकर साथी किसानों के खेतों में कमर्शियल स्प्रे सर्विस (भाड़े पर ड्रोन) शुरू कर सकते हैं, जिससे हर महीने ₹40,000 से ₹50,000 की बंधी-बंधाई अतिरिक्त कमाई हो सकती है।
4. सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें? (How to Apply?)
अगर आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको इसके लिए ड्रोन लेने के लिए अपना आवेदन करना होगा। सबसे पहले आप इसके लिए अपने राज्य के आधिकारिक कृषि पोर्टल (जैसे उत्तर प्रदेश के लिए डीबीटी एग्रीकल्चर, हरियाणा के लिए एग्री-हरियाणा) पर जाएं। इसके बाद
कृषि यंत्रीकरण योजना (SMAM) के तहत कृषि ड्रोन अनुदान के विकल्प को चुनें।
अपने जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, जमीन की खतौनी, बैंक पासबुक और रिमोट पायलट ट्रेनिंग सर्टिफिकेट ऑनलाइन अपलोड करें। आवेदन स्वीकृत होने के बाद विभाग की अनुमति से रजिस्टर्ड वेंडर्स (डीजीसीए अप्रूव्ड कंपनियाँ) से ही ड्रोन खरीदें ताकि सब्सिडी सीधे आपके खाते में क्रेडिट (DBT) हो सके।




