चंडीगढ़: हरियाणा के बड़े शहरों की हाईराइज और ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए एक बड़ी और राहत भरी प्रशासनिक खबर है। राज्य सरकार बिल्डरों और डेवलपर्स के नाम पर चल रहे सामूहिक (Bulk) बिजली कनेक्शनों की दशकों पुरानी व्यवस्था को हमेशा के लिए समाप्त करने जा रही है।
ऊर्जा विभाग द्वारा तैयार की जा रही एक नई दूरगामी नीति के तहत अब प्रत्येक फ्लैट मालिक को सीधे बिजली वितरण निगम (DHBVN/UHBVN) से व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन और मीटर की सुविधा मिलेगी। इस नीतिगत बदलाव के बाद उपभोक्ताओं के अधिकारों को सीधे कानूनी मजबूती मिलेगी और बिजली आपूर्ति से बिल्डरों का नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
बिल्डरों की वित्तीय लापरवाही की सजा भुगत रहे थे फ्लैट मालिक
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पंचकूला जैसे शहरों की निजी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में मुख्य बिजली कनेक्शन बिल्डर या आरडब्ल्यूए (RWA) के नाम पर होता है। पूरी सोसायटी के फ्लैट्स को इसी सिंगल पॉइंट कनेक्शन से इंटरनल सब-मीटरिंग के जरिए बिजली बांटी जाती है।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा खामियाजा आम निवासियों को तब भुगतना पड़ता है जब बिल्डर या डेवलपर लोगों से मेंटेनेंस और बिजली का पैसा वसूलने के बावजूद उसे बिजली निगम के पास जमा नहीं कराता।
कई मामलों में बिल्डर के दिवालिया होने, परियोजना को बीच में छोड़ देने या कोर्ट कचहरी के चक्कर में फंसने के कारण नियमित रूप से बिल भरने वाले हजारों ईमानदार फ्लैट मालिक भी हफ्तों तक बिजली कटौती का सामना करने को मजबूर होते हैं।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज के हस्तक्षेप के बाद बनी राज्य स्तरीय नीति की रूपरेखा
सचिवालय सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में गुरुग्राम और फरीदाबाद की दर्जनों सोसायटियों के निवासियों ने इस गंभीर अड़चन को लेकर सरकार का दरवाजा खटखटाया था। कई विवादित मामलों में सूबे के ऊर्जा मंत्री अनिल विज के सीधे हस्तक्षेप के बाद विशेष आदेश जारी कर व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन बांटे गए थे।
तदर्थ (Ad-hoc) फसलों के बजाय अब सरकार इस समस्या का स्थायी और संस्थागत समाधान ढूंढ रही है। ऊर्जा मंत्री के कड़े निर्देशों के बाद ऊर्जा विभाग ने पूरे प्रदेश के लिए एक 'एक समान और स्पष्ट नीति' का मसौदा (Draft Policy) तैयार करना शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में हर जिला और हर डिपो एक ही पारदर्शी प्रक्रिया के तहत व्यक्तिगत कनेक्शन जारी कर सके।
बदलेगी पूरी व्यवस्था, सीधे बिजली निगम के प्रति जवाबदेह होगा उपभोक्ता
नई नीति के लागू होने के बाद सामूहिक कनेक्शन को व्यक्तिगत कनेक्शन में बदलने की पूरी प्रक्रिया, तकनीकी मापदंड और इंफ्रास्ट्रक्चर की शिफ्टिंग फीस जैसी शर्तें पूरी तरह पारदर्शी हो जाएंगी।
- पारदर्शी बिलिंग: हर फ्लैट मालिक का सीधा संबंध बिजली निगम से होगा, जिससे उन्हें सरकारी स्लैब के अनुसार वास्तविक और अलग बिजली बिल मिलेगा।
- त्वरित शिकायत निवारण: मीटर खराब होने या बिजली की अन्य तकनीकी खामियों की शिकायत के लिए उपभोक्ताओं को बिल्डर के रहमोकरम पर नहीं रहना होगा, बल्कि वे सीधे निगम में शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
- सुरक्षित आपूर्ति: बिल्डर के डिफॉल्टर होने या कानूनी विवाद में फंसने की स्थिति में भी बिजली निगम किसी भी व्यक्तिगत उपभोक्ता की बिजली आपूर्ति को बाधित नहीं कर सकेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य के रियल एस्टेट सेक्टर में बिजली वितरण को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही के एक नए युग की शुरुआत होगी।