बुधवार, 29 जुलाई 2026

हरियाणा में HSIIDC का बड़ा फैसला: प्लॉट लेकर कारखाने न लगाने वालों के आवंटन होंगे रद्द, जब्त होगी जमा राशि

Written by: Vinod Yadav

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राज्य के औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (IMT) में खाली जमीन रोककर बैठे भूखंड आवंटियों पर शिकंजा अब कसने की तैयार सरकार ने कर दी है और आपको बता दें की एस्टेट मैनेजमेंट प्रोसीजर (EMP) नियमों के तहत अंतिम नोटिस जारी भी कर दिया गया है। इस दौरान अब रद्द जमीनों की नए सिरे से होगी ई-ऑक्शन करवाने के मूड में है सरकार। जानिए पूरा अपडेट -


हरियाणा में HSIIDC का बड़ा फैसला: प्लॉट लेकर कारखाने न लगाने वालों के आवंटन होंगे रद्द, जब्त होगी जमा राशि
हरियाणा में HSIIDC का बड़ा फैसला: प्लॉट लेकर कारखाने न लगाने वालों के आवंटन होंगे रद्द, जब्त होगी जमा राशि
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चंडीगढ़, विराट भारत न्यूज़। राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और लैंड होल्डिंग स्पेक्यूलेशन (ज़मीन रोककर सट्टेबाज़ी करने की प्रवृत्ति) को खत्म करने के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (HSIIDC) ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य के विभिन्न औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (IMT) जैसे मानेसर, फरीदाबाद, रोहतक, खरखौदा और सोहना में आवंटित सैकड़ों ऐसे प्लॉटों की समीक्षा शुरू कर दी गई है जहाँ आवंटियों ने कब्ज़ा लेने के सालों बाद भी कोई व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं किया है।

निगम प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि केवल संपत्ति के तौर पर ज़मीन रोककर रखने की मंशा वाले आवंटियों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे आवंटियों को अंतिम कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) भेजा जा रहा है। आज भी सैकड़ों की संख्या में ऐसी खाली ज़मीन पड़ी है को की कारखाना लगाएंगे कहकर खरीदारी की गई थी लेकिन उस पर कुछ नहीं हुआ और आज भी खली पड़ी हुई है। प्रदेश सरकार अब इन सभी लोगों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।

HSIIDC के एस्टेट मैनेजमेंट प्रोसीजर (EMP) के नियम

हरियाणा सरकार की औद्योगिक नीति और HSIIDC के एस्टेट मैनेजमेंट प्रोसीजर (EMP) नियमों के अनुसार किसी भी निवेशक को प्लॉट आवंटित होने के बाद एक निर्धारित अवधि (सामान्यतः 2 से 3 साल) के भीतर बिल्डिंग प्लान पास कराकर उत्पादन शुरू करना अनिवार्य होता है:

  • एक्सटेंशन फीस और जब्ती प्रावधान: यदि कोई उद्यमी वाजिब कारणों के चलते समय पर निर्माण नहीं कर पाता है तो उसे नियमानुसार एक्सटेंशन फीस (विस्तार शुल्क) का भुगतान कर अतिरिक्त समय दिया जाता है। हालांकि एक्सटेंशन अवधि खत्म होने के बाद भी अगर काम बंद रहता है तो निगम के पास रेजम्पशन (Resumption/रद्द करने) और जमा की गई शुरुआती राशि (Earnest Money) को ज़ब्त करने का पूर्ण अधिकार है।
  • थर्ड पार्टी ट्रांसफर पर रोक: परियोजना पूरी होने या उत्पादन शुरू होने से पहले किसी तीसरे पक्ष (Third Party) को प्लॉट बेचना या हस्तांतरित करना बिना HSIIDC की लिखित अनुमति के पूरी तरह अवैध है।

नए निवेशकों के लिए खुलेगी ई-ऑक्शन (e-Auction) की राह

सरकार की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य राज्य में वास्तविक उद्योगों को स्थापित करना है। जो भूखंड निरस्त (Cancel) किए जाएंगे उन्हें HSIIDC दोबारा अपने लैंड बैंक (Land Bank) में शामिल करेगा। इसके बाद इन प्लॉटों की पारदर्शिता के साथ ई-ऑक्शन (e-Auction) प्रक्रिया आयोजित की जाएगी, जिससे वास्तविक रूप से फैक्ट्रियां और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के इच्छुक नए उद्यमियों को ज़मीन मिल सके।

आवंटी ध्यान दें: आवंटन रद्द होने से कैसे बचाएं अपना प्लॉट?

यदि आप भी HSIIDC के किसी इंडस्ट्रियल एस्टेट में प्लॉट धारक हैं और आपको नोटिस मिला है तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • पोर्टल पर स्थिति अपडेट करें: HSIIDC के आधिकारिक ई-सेवा पोर्टल (hsiidcesewa.org.in) पर जाकर अपने प्रोजेक्ट की वास्तविक प्रगति और स्वीकृत लेआउट प्लान की रिपोर्ट अपलोड करें।
  • वैध कारण और एक्सटेंशन अर्जी: यदि बिजली कनेक्शन, एनओसी (NOC) या बैंक लोन की वजह से देरी हुई है तो प्रामाणिक दस्तावेजों के साथ एक्सटेंशन फीस जमा कर समय-सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन करें।
  • अपील का अधिकार: यदि आवंटन रद्द करने का आदेश जारी हो जाता है तो उद्योग विभाग के प्रशासनिक सचिव और HSIIDC प्रबंध निदेशक की अधिकारिक कमेटी के समक्ष आदेश के खिलाफ निर्धारित समय में अपील की जा सकती है।

Vinod Yadav
लेखक के बारे में Vinod Yadav

विनोद यादव 'विराट भारत न्यूज़' के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे डिजिटल मीडिया, रणनीतिक पत्रकारिता और निष्पक्ष समाचार कवरेज में वर्षों का अनुभव रखते हैं। उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय मुद्दों, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनहितैषी पत्रकारिता पर है। विराट भारत न्यूज़ के माध्यम से वे पाठकों तक सत्य, विश्वसनीय और सटीक समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। View all posts by Vinod Yadav →