मंगलवार, 28 जुलाई 2026

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर तीखी बहस, जानिए सरकार के कड़े प्रावधान और विपक्ष के सवाल

Written by: Priyanshi Rao

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संसद के मानसून सत्र में नीट (NEET) विवाद और देशव्यापी छात्र विरोध के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा शुरू; सरकार ने दोषियों के लिए 10 साल तक की सख्त कैद और भारी जुर्माने का प्रस्ताव रखा, जबकि विपक्ष ने कानून के साथ-साथ पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल।


नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर तीखी बहस, जानिए सरकार के कड़े प्रावधान और विपक्ष के सवाल
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर तीखी बहस, जानिए सरकार के कड़े प्रावधान और विपक्ष के सवाल. Image by Virat Bharat Media

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में नीट (NEET-UG) परीक्षा धांधली और देशव्यापी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्र सरकार ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए प्रस्तुत कर दिया है। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश इस विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और सियासी घमासान देखने को मिल रहा है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सर्वसम्मति से चर्चा करें और कानून को मजबूत बनाने में सहयोग दें।

क्या हैं नए संशोधन विधेयक के मुख्य प्रावधान और सख्त सजा?

वर्ष 2024 में बने मूल कानून को अधिक प्रभावी और तकनीक-अनुकूल बनाने के लिए इसमें कई नए और कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य संगठित परीक्षा माफिया, डमी कैंडिडेट और परीक्षा केंद्रों में होने वाली डिजिटल सेंधमारी को पूरी तरह रोकना है।

  • कड़ी सजा का प्रावधान: पेपर लीक और संगठित धांधली के दोषियों के लिए न्यूनतम सजा को 3-5 साल से बढ़ाकर 5 से 10 वर्ष तक की जेल करने का प्रस्ताव है।

  • भारी जुर्माना और फास्ट-ट्रैक कोर्ट: व्यक्तिगत और संस्थागत दोषियों पर 50 लाख रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। इसके अलावा, मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए हर राज्य में फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी, जिन्हें दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।

  • तकनीकी व डिजिटल परिभाषा: नए विधेयक में डिजिटल हैकिंग, सर्वर से छेड़छाड़ और छद्म परीक्षार्थियों (Proxy Candidates) को भी गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन और विपक्ष के तीखे सवाल

संसदीय कार्यवाही के दौरान विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और द्रमुक (DMK) के सांसदों ने विधेयक का विरोध न करते हुए भी सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक विफलता पर जमकर निशाना साधा। विपक्ष ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई, पेलेट गन के कथित इस्तेमाल और नीट परीक्षा प्रणाली की मूल संरचना पर गंभीर सवाल खड़े किए।

विपक्षी नेताओं का तर्क है कि केवल सख्त कानून बना देने मात्र से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों का पुनर्गठन नहीं किया जाता। सरकार ने संसद को आश्वस्त किया है कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित विशेष टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर देश की पूरी परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और ‘लीक-प्रूफ’ बनाया जा रहा है।

यह वीडियो संसद के मानसून सत्र के दौरान नीट विवाद और पेपर लीक विरोधी विधेयक पर लोकसभा में हुई गर्मागर्म बहस और पक्ष-विपक्ष की दलीलों की सीधी जानकारी देता है।

Priyanshi Rao
लेखक के बारे में Priyanshi Rao

प्रियांशी यादव 'विराट भारत न्यूज़' में वरिष्ठ राजनीति एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों की विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों, संसदीय कार्यवाहियों और वैश्विक कूटनीति पर पैनी नज़र रखती हैं। उनके विश्लेषणात्मक लेख पाठकों को जटिल राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की सरल समझ प्रदान करते हैं। View all posts by Priyanshi Rao →

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