राजनीति
Congress Organisational Reshuffle: राहुल गांधी से मिले रणदीप सुरजेवाला, गुजरात-कर्नाटक में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने पर हुआ बड़ा मंथन
कांग्रेस आलाकमान द्वारा संगठन में किए गए बड़े फेरबदल के बाद राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है। गुजरात का नया प्रभारी महासचिव नियुक्त किए जाने के बाद हुई इस पहली बैठक में पश्चिम और दक्षिण भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण राज्यों- गुजरात और कर्नाटक की राजनीतिक रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। जानिए कांग्रेस के इस नए संगठनात्मक ब्लूप्रिंट की पूरी रिपोर्ट।
नई दिल्ली/चंडीगढ़: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक बदलावों और आगामी चुनावी रणनीतियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी सिलसिले में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने देश की राजधानी दिल्ली में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक को बेहद संवेदनशील और उच्च स्तरीय माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी आलाकमान द्वारा संगठन में हाल ही में किए गए बड़े बदलावों के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली आधिकारिक मुलाकात थी।
बैठक के दौरान मुख्य रूप से गुजरात की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, वहां के संगठनात्मक ढांचे को दुरुस्त करने और कर्नाटक में चल रहे घटनाक्रमों को लेकर गंभीर विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और सुरजेवाला के बीच करीब एक घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में दोनों ही राज्यों में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए एक विशेष रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी है।
सुरजेवाला को मिली दोहरी जिम्मेदारी: पश्चिम और दक्षिण भारत की कमान
कांग्रेस संगठन में करीब एक सप्ताह पहले किए गए व्यापक फेरबदल के बाद रणदीप सिंह सुरजेवाला की पार्टी के भीतर भूमिका और अधिक मजबूत होकर उभरी है। आलाकमान ने सुरजेवाला को गुजरात कांग्रेस का नया प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। इसके साथ ही, पार्टी ने उन पर अपना भरोसा कायम रखते हुए कर्नाटक के प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी भी उनके पास ही बरकरार रखी है।
इस दोहरी जिम्मेदारी के बाद अब सुरजेवाला के पास पश्चिम भारत के बेहद महत्वपूर्ण राज्य गुजरात और दक्षिण भारत के आर्थिक व राजनीतिक केंद्र कर्नाटक का पूरा प्रभार आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दो बड़े और विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों वाले राज्यों की कमान एक साथ सौंपना यह दर्शाता है कि कांग्रेस नेतृत्व सुरजेवाला की संगठनात्मक क्षमता और संकट प्रबंधन (Crisis Management) कौशल पर कितना अधिक निर्भर है।
गुजरात में संगठन को पुनर्जीवित करने की बड़ी चुनौती
राहुल गांधी के साथ हुई इस बैठक में सबसे ज्यादा समय गुजरात के राजनीतिक एजेंडे को लेकर तय किया गया। गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है और वहां पार्टी संगठन को नए सिरे से खड़ा करना सुरजेवाला के लिए एक कठिन परीक्षा की तरह है। बैठक के दौरान सुरजेवाला ने राहुल गांधी के सामने गुजरात कांग्रेस की वर्तमान स्थिति का एक प्रारंभिक आकलन प्रस्तुत किया।
रणनीति के तहत, गुजरात में पार्टी केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर ग्रामीण अंचलों, आदिवासी पट्टों और युवाओं के बीच अपनी पैठ दोबारा बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। राहुल गांधी ने भी इस बात पर जोर दिया कि गुजरात में भाजपा के मजबूत किले को भेदने के लिए स्थानीय नेताओं को साथ लेकर एक आक्रामक और एकजुट कैम्पेन चलाने की आवश्यकता है। सुरजेवाला जल्द ही अहमदाबाद का दौरा कर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के पदाधिकारियों और विधायकों के साथ मैराथन बैठकें शुरू कर सकते हैं।
कर्नाटक में सत्ता और संगठन के बीच समन्वय पर जोर
बैठक का दूसरा मुख्य एजेंडा कर्नाटक राज्य रहा, जहां कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार काम कर रही है। कर्नाटक का प्रभारी बने रहने के कारण सुरजेवाला पर वहां सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की निरंतर जिम्मेदारी है। राहुल गांधी के साथ चर्चा के दौरान कर्नाटक सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं (गारंटी योजनाओं) के क्रियान्वयन और उनके राजनीतिक लाभ को लेकर समीक्षा की गई।
इसके अतिरिक्त, कर्नाटक में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और सांगठनिक नियुक्तियों को लेकर भी चर्चा हुई। सुरजेवाला ने नेतृत्व को आश्वस्त किया कि कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार और डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाले संगठन के बीच संतुलन पूरी तरह से कायम है और पार्टी वहां दक्षिण भारत में अपने सबसे मजबूत आधार को और अधिक विस्तारित करने की दिशा में बढ़ रही है।
भविष्य की रणनीति और बड़े बदलावों के संकेत
इस उच्च स्तरीय मुलाकात के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस आने वाले दिनों में कई राज्यों के सांगठनिक ढांचे में और भी बड़े फेरबदल कर सकती है। राहुल गांधी पार्टी में युवा और अनुभवी चेहरों के मिश्रण को आगे बढ़ाना चाहते हैं, और सुरजेवाला जैसे वरिष्ठ नेताओं को अहम राज्यों की कमान सौंपना इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
आगामी दिनों में गुजरात और कर्नाटक दोनों ही राज्यों में कई नए जिला अध्यक्षों और ब्लॉक स्तर के प्रभारियों की नियुक्तियां देखने को मिल सकती हैं। सुरजेवाला की इस सक्रियता और राहुल गांधी के साथ सीधे संवाद से यह साफ है कि कांग्रेस पश्चिम और दक्षिण भारत में किसी भी स्तर पर ढील देने के मूड में नहीं है और वह आने वाले चुनावी समर के लिए अभी से अपने रणनीतिक पासे फेंकने में जुट गई है।



