गुरुग्राम: खरीफ विपणन सीजन (Kharif Marketing Season) 2026-27 के तहत गुरुग्राम जिले की अनाज मंडियों में बाजरा उत्पादक किसानों की चहल-पहल तेज हो गई है। फसल बेचने आ रहे किसानों को खुले बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए प्रशासन और सरकार की भावांतर भरपाई योजना (Price Deficit Compensation Scheme) का सीधा असर मंडियों में देखने को मिल रहा है। जिले की तीनों प्रमुख अनाज मंडियों में अब तक कुल 32,390 मीट्रिक टन (Metric Tonnes) बाजरे की आवक दर्ज की जा चुकी है।
आंकड़ों के लिहाज से इस सीजन में जटौली मंडी खरीद का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी है, जहां अकेले 21,227 मीट्रिक टन बाजरा पहुंचा है। इसके अलावा फर्रुखनगर मंडी में 8,020 मीट्रिक टन और सोहना मंडी में 3,142 मीट्रिक टन बाजरे की आवक हो चुकी है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग (Food and Civil Supplies Department) के अनुसार सभी खरीद केंद्रों पर तौल और गेट पास (Gate Pass) की व्यवस्था को दुरुस्त रखा गया है, ताकि किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े।
किसानों के आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए सरकार ने बाजरे पर 2,900 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price - MSP) तय किया है। यदि बाजार भाव इस दर से नीचे रहता है, तो निर्धारित पात्रता और नियमों के तहत सरकार अधिकतम 600 रुपये प्रति क्विंटल तक के अंतर की राशि किसानों को भावांतर सहायता के रूप में सीधे उनके बैंक खातों (Direct Benefit Transfer) में जारी करेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मंडियों में भंडारण और उठान (Lifting Process) में कोई कोताही न बरती जाए।








