पंचकुला/चंडीगढ़ (समाचार डेस्क): हरियाणा सरकार ने प्रदेश के लाखों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने वाली आयुष्मान-चिरायु योजना के नियमों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कर दिया है।
यह कदम योजना में हो रही धांधली और अपात्र लोगों द्वारा उठाए जा रहे गलत फायदे को रोकने के लिए उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के नए महानिदेशालय आदेश के मुताबिक अब आपकी फैमिली आईडी (परिवार पहचान पत्र) में दर्ज सालाना आय ही यह तय करेगी कि आपको 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा या नहीं। जिन लोगों ने अपनी आय छुपाकर कार्ड बनवाए थे, उनके लिए अब मुश्किलें खड़ी होने वाली हैं।
फैमिली आईडी की नई वेरिफिकेशन से कटेंगे लाखों नाम
विराट भारत की यूटिलिटी डेस्क प्रमुख सलोनी यादव की रिपोर्ट के अनुसार, इस नए नियम का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ने वाला है जिनकी सालाना आय पिछले 1 साल के भीतर बढ़ गई है। विभाग ने आईटी सेल को निर्देश दिए हैं कि वे परिवार पहचान पत्र के डेटाबेस को सीधे आयुष्मान पोर्टल से सिंक करें।
यदि किसी परिवार की आय वेरिफिकेशन के दौरान 1 लाख 80 हजार रुपये या प्रीमियम श्रेणी के तहत 3 लाख रुपये से अधिक पाई जाती है, तो उनका चिरायु कार्ड तुरंत प्रभाव से सस्पेंड या ब्लॉक कर दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि इस छंटनी के जरिए केवल उन्हीं वास्तविक गरीब परिवारों को अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिले, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत है। इसके लिए सभी जिलों के नागरिक अस्पतालों को भी डेटा री-वेरिफिकेशन की सूची भेज दी गई है।
इलाज के समय बायोमेट्रिक और आधार लिंकिंग हुआ अनिवार्य
अस्पतालों में फर्जी मरीजों के दाखिले और क्लेम के नाम पर होने वाले घोटालों को रोकने के लिए भी सरकार ने इस बार कड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया है।
अब किसी भी निजी या सरकारी लिस्टेड अस्पताल में मरीज को दाखिल करते समय और छुट्टी (Discharge) देते समय, परिवार के मुख्य सदस्य या मरीज का लाइव बायोमेट्रिक (अंगूठे का निशान) अनिवार्य कर दिया गया है। यदि फिंगरप्रिंट मैच नहीं होता है तो अस्पताल उसका क्लेम फाइल नहीं कर पाएगा।
अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे सीएससी (CSC) केंद्रों पर जाकर अपने कार्ड की ई-केवाईसी (e-KYC) तुरंत पूरी करवा लें, ताकि आपातकाल के समय अस्पताल में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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