शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

Kharif Crops: अगस्त-सितंबर में कम बारिश से धान और मक्के में बढ़ गया इन रोगों का खतरा, रासायनिक दवाओं को छोड़ें, ऐसे करें फ्री में देसी इलाज

Written by: Dharmendra Acharya

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अगस्त-सितंबर में मानसून की बेरुखी और उमस भरे सूखे मौसम के कारण धान और मक्के की फसल में कई गंभीर बीमारियां लग रही हैं। जानिए इन रोगों के लक्षण और गोमूत्र, मट्ठे व नीम से तुरंत इलाज करने का अचूक घरेलू तरीका।


अगस्त-सितंबर में कम बारिश से धान और मक्के में बढ़ गया इन रोगों का खतरा
अगस्त-सितंबर में कम बारिश से धान और मक्के में बढ़ गया इन रोगों का खतरा
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Kharif Crops: देश के कई हिस्सों में अगस्त और सितंबर के महीनों में मानसून की सुस्ती और कम बारिश ने खरीफ के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस सूखे और अत्यधिक उमस (Humid Weather) वाले मौसम के कारण खेतों में खड़ी धान (Paddy) और मक्के (Maize) की फसलों में कीटों और फंगल इन्फेक्शन (Fungus) का हमला बहुत तेजी से बढ़ रहा है। पानी की कमी से वैसे ही फसलें तनाव में हैं, ऊपर से इन रोगों के कारण पैदावार आधी होने का खतरा मंडरा रहा है।

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बाजार से महंगी और जहरीली रासायनिक दवाएं खरीदकर लागत बढ़ाने के बजाय, किसान भाई अपने घर पर ही मौजूद प्राकृतिक चीजों से इन रोगों का तुरंत और प्रभावी इलाज कर सकते हैं। आइए एक कृषि एक्सपर्ट की नजर से समझते हैं इन प्रमुख रोगों के लक्षण और उनके अचूक देसी इलाज।

धान की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग और देसी इलाज

कम बारिश और तेज धूप के कारण धान की फसल में इस समय दो बड़ी बीमारियां सबसे ज्यादा देखी जा रही हैं जिनका अगर किसान भाई समय रहते उपाय कर लेते है तो उनकी फसल में पैदावार भी बनी रहेगी और फसल की गुणवत्ता भी बरक़रार रहेगी।

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झोंका रोग (Blast Disease)

धान की फसल में झोंका रोग (Blast Disease) से धान की पत्तियों पर आंख की आकृति के भूरे या नीले रंग के धब्बे बनने लगते हैं। धीरे-धीरे ये धब्बे पूरी पत्ती को सुखा देते हैं और बालियां भी काली होकर टूट जाती हैं। इसके तुरंत इलाज के लिए किसान भाइयों को 1 एकड़ खेत के लिए 5 लीटर पुराना खट्टा मट्ठा (छाछ) लें। इसे एक मिट्टी के बर्तन या प्लास्टिक के ड्रम में कम से कम 10 से 15 दिनों के लिए सड़ा लें। इसके बाद इसमें 150 लीटर पानी मिलाकर फसल पर अच्छी तरह छिड़काव (Spray) करें। मट्ठे में मौजूद लैक्टिक एसिड फंगस को तुरंत मार देता है।

तना छेदक कीट (Stem Borer)

तना छेदक कीट (Stem Borer) रोग धान की फसल के लिए बहुत अधिक हानिकारक होता है क्योंकि इसके चलते पौधों के तने पूरी तरह से ख़राब हो जाते है। यह कीड़ा धान के पौधे के तने के अंदर घुसकर उसे अंदर ही अंदर खा जाता है जिससे धान की बीच वाली पत्ती सूख जाती है और बालियां सफेद (सफेद बाली) निकलती हैं जिनमें दाना नहीं बनता। इसके इलाज के लिए किसान भाई 5 किलो नीम की पत्तियां कुचलकर 5 लीटर देसी गाय के गोमूत्र और 2 किलो गोबर के साथ 100 लीटर पानी में मिलाकर 48 घंटे के लिए छोड़ दें। इस नीमास्त्र को छानकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। नीम की कड़वाहट से कीड़े तने को छोड़ देते हैं।

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मक्के की फसल के मुख्य रोग और उनका घरेलू समाधान

मक्के की फसल को सूखे के दौरान इन दो सबसे खतरनाक आफत का सामना करना पड़ता है और अगर किसान भाई समय पर ध्यान नहीं देते है तो उनकी पूरी फसल ख़राब होने का खतरा रहता है।

फॉल आर्मीवर्म (Fall Armyworm – सैनिक कीट)

यह एक बेहद खतरनाक इल्ली (कैटरेपिलर) है जो मक्के के पौधे के पोंगे (भोंगे या बीच के हिस्से) में बैठकर पूरी पत्तियों को छलनी कर देती है। कम बारिश में यह कीट बहुत तेजी से फैलता है। किसान भाई इससे बचाव करने के लिए सुबह-सुबह जब ओस पड़ी हो तब लकड़ी की बारीक छानी हुई राख और सूखी रेत (बालू) को 1:1 के अनुपात में मिलाकर पौधे के पोंगे (बीच के हिस्से) में सीधे हाथों से डालें। राख और रेत इल्ली की त्वचा को छील देती है और वह मर जाती है। यह पूरी तरह मुफ्त और सबसे कारगर इलाज है।

मक्के का झुलसा रोग (Leaf Blight)

मक्के का झुलसा रोग में मक्के की निचली पत्तियों पर नाव के आकार के लंबे, मटमैले या भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। संक्रमण बढ़ने पर पूरी पत्तियां जलकर सूखी हुई नजर आती हैं। किसान भाई इसके लिए 10 लीटर पानी में 1 लीटर देसी गाय का पुराना गोमूत्र और 100 ग्राम हिंग का पानी मिलाकर स्प्रे करें। गोमूत्र एक बेहतरीन प्राकृतिक फंगिसाइड और एंटी-बैक्टीरियल दवा है जो फसल को तुरंत सुरक्षा कवच देती है।

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इस मौसम में किसान भाई इन बातों का रखें विशेष ध्यान

धान और मक्के की खेती करने वाले किसान भाई इस मौसम में यदि संभव हो तो ट्यूबवेल या नहर के जरिए खेत में हल्की सिंचाई जरूर करें। पूरी तरह सूखा खेत कीड़ों को ज्यादा आकर्षित करता है। इसके अलावा रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करने से मकड़ी, लेडीबर्ड बीटल जैसे मित्र कीट मर जाते हैं जो हानिकारक कीड़ों को खाते हैं। देसी इलाज से मित्र कीट सुरक्षित रहते हैं। इसलिए रासायनिक कीटनाशकों की जगह जितना हो सके देशी तरीके से खेतों में रोगों का इलाज करे।

Dharmendra Acharya
About the Author Dharmendra Acharya

धर्मेंद्र आचार्य 'विराट भारत न्यूज़' में मुख्य कृषि एवं मौसम संपादक हैं। वे आधुनिक कृषि तकनीकों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy), मौसम विज्ञान, फसलों के वैज्ञानिक प्रबंधन और मंडियों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सटीक रिपोर्टिंग करते हैं। वे भारतीय किसानों और ग्रामीण भारत की आवाज़ को मजबूती से उठाते हैं। View all posts by Dharmendra Acharya →

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