शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
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निजीकरण की चिंगारी से दहका हरियाणा: 600 से ज्यादा फीडर ठप, यूपी ने मदद से खींचे हाथ, विज बोले- कोर्ट से निकलेगा हल

हरियाणा में निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों की हड़ताल से 15 जिलों में ब्लैकआउट। 28 घंटे से बत्ती गुल होने पर फरीदाबाद-गुरुग्राम में हंगामा। जानिए क्यों ठप हुई सप्लाई और क्या है पूरा मामला।

बिजली हड़ताल का दूसरा दिन: पानी को तरसे शहर, रातभर जाम रहे हाईवे
​हरियाणा में अंधेरा: 15 जिलों में 28 घंटे से बिजली गुल, गुरुग्राम-फरीदाबाद में सड़कों पर उतरे लोग
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Haryana News: गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में हरियाणा के बिजली कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है। हड़ताल के चलते प्रदेश के 15 से ज्यादा जिलों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में 28 घंटे से ज्यादा समय से आपूर्ति ठप है। रात के अंधेरे में बिजली न आने से भड़के लोगों ने फरीदाबाद के सारण चौक, सेक्टर-64 पावर हाउस, जगाधरी के चूना भट्ठी चौक समेत सिरसा और गुरुग्राम में सड़कों पर उतरकर जाम लगा दिया।

​बिजली गुल होने से घरों में पीने के पानी की किल्लत खड़ी हो गई है। बैंकों, बीमा दफ्तरों और औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन रुक गया है और लोग महंगे किराए पर जनरेटर मंगाने को मजबूर हैं। इधर राजस्थान बॉर्डर पर रेवाड़ी जिले के भी यही हाल रहा है ओर गांवों में बिजली सप्लाई ठप्प हो चुकी है। लोग पानी के लिए तरसने लगे है।

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​600 से ज्यादा फीडर ठप, भिवानी सबसे ज्यादा प्रभावित

​हरियाणा विद्युत इंजीनियर्स एसोसिएशन के मुताबिक हड़ताल के पहले ही दिन 33 केवी के 118 और 11 केवी के 510 से ज्यादा फीडर बंद हो गए। सबसे बुरा हाल भिवानी में रहा जहाँ अकेले 280 फीडरों पर ताला लग गया। इसके अलावा कैथल, टोहाना, सांपला, महम, हिसार और झज्जर में बुधवार रात से शुरू हुआ ब्लैकआउट गुरुवार देर रात तक जारी रहा। कुछ इलाकों में केबलों में शरारती तत्वों द्वारा कीलें ठोकने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे तकनीकी फॉल्ट बढ़ गए।

​पटवारी, ग्राम सचिव और ITI छात्र भी नहीं खोज पाए फॉल्ट

​सप्लाई बहाल रखने के लिए सरकार द्वारा ठेकेदारों के जरिए तैनात किए गए 1000 वैकल्पिक कर्मचारी नाकाफी साबित हुए। सरकार ने फील्ड में कानून-व्यवस्था और निगरानी के लिए पटवारियों, ग्राम सचिवों और अंबाला जैसे जिलों में ITI छात्रों तक की ड्यूटी लगा दी।

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​हालांकि तकनीकी अनुभव न होने के कारण यह प्रशासनिक फॉर्मूला पूरी तरह नाकाम रहा। सब-स्टेशनों पर पुलिस तैनात रहने से तोड़फोड़ तो रुकी, लेकिन लाइनों में आए बड़े ब्रेकडाउन को ठीक करने वाला कोई विशेषज्ञ मौजूद नहीं था। उधर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से तकनीकी अमला बुलाने की योजना पर भी पानी फिर गया, क्योंकि यूपी के कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल के दौरान हरियाणा जाने से साफ मना कर दिया है।

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​'हड़ताल बेबुनियाद, फैसला विनियामक आयोग का': अनिल विज

​बढ़ते गतिरोध पर बिजली मंत्री अनिल विज ने सख्त रुख अपनाते हुए हड़ताल को बेवजह करार दिया है। विज ने कहा

"यह फैसला राज्य सरकार ने नहीं लिया है, बल्कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) का है। अगर किसी को ऐतराज है तो उसे कानूनी रास्ता अपनाना होगा और कोर्ट में लड़ाई लड़नी होगी। जो लोग सरकार पर निजीकरण का ठीकरा फोड़ रहे हैं, उन्हें पहले विद्युत कानून (Act) को ठीक से समझ लेना चाहिए।"

​क्यों भड़का है विवाद? समझिए पूरा गणित

​इस पूरे विवाद की जड़ गुरुग्राम और नूंह सर्कल में निजी कंपनी 'इलेवन पावर' को मिला सप्लाई लाइसेंस है।

  1. ​रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा दांव पर: दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के कुल 22,087 करोड़ रुपये के राजस्व में से 42.98% (करीब 9,493 करोड़ रुपये) अकेले गुरुग्राम और नूंह के 8.68 लाख उपभोक्ताओं से आता है।
  2. ​कर्मचारियों का डर: कर्मचारियों का तर्क है कि सबसे ज्यादा कमाई वाला इलाका निजी हाथों में जाने से सरकारी निगम कंगाल हो जाएगा। निगम का दायरा घटने से बड़े पैमाने पर छंटनी, ट्रांसफर्स और नई भर्तियों पर रोक का खतरा मंडरा रहा है।

​निजी कंपनी का प्लान और लाइसेंस रद्द करने के नियम

​नियामक आयोग के सामने रखे गए प्लान के मुताबिक निजी कंपनी अगले डेढ़ साल में अपना अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी और 24 घंटे में नया कनेक्शन, रियल-टाइम आउटेज अलर्ट और आधुनिक कॉल सेंटर जैसी सुविधाएं देगी।

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​वहीं आयोग के पूर्व सदस्य तेज सिंह तेवतिया के अनुसार इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 के तहत जनहित को देखते हुए या कंपनी द्वारा सेवा शर्तों का उल्लंघन करने, वित्तीय अक्षमता साबित होने पर आयोग के पास लाइसेंस रद्द करने का भी पूरा अधिकार सुरक्षित है। फिलहाल, कर्मचारी यूनियनों और सरकार के बीच तनातनी का सीधा खामियाजा आम जनता को भीषण अंधेरे और पानी की किल्लत के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

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