पृथ्वी से करीब 4 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित रहस्यमयी खगोलीय पिंड OJ 287 पर एक दशक तक किए गए विस्तृत अध्ययन से इसके केंद्र में मौजूद द्विआधारी अतिविशाल ब्लैक होल प्रणाली के व्यवहार को समझने में नई जानकारी मिली है। आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (ARIES), नैनीताल के वैज्ञानिकों के समन्वय में हुए इस अध्ययन में 18 देशों के 106 वैज्ञानिकों ने 2015 से 2025 के बीच दो दर्जन से अधिक दूरबीनों की मदद से OJ 287 का लगातार अवलोकन किया।

OJ 287 एक ब्लेज़र है, यानी ऐसा सक्रिय खगोलीय पिंड जिसका शक्तिशाली प्लाज्मा जेट लगभग प्रकाश की गति से पृथ्वी की दिशा में निकलता है। इसके केंद्र में दो अतिविशाल ब्लैक होल एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं। इनकी कक्षीय अवधि करीब 12 वर्ष बताई गई है।

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150 वर्षों के रिकॉर्ड में सबसे व्यापक ऑप्टिकल डेटा

डॉ. आलोक सी. गुप्ता के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में एक दशक के ऑप्टिकल अवलोकनों को पहले के रिकॉर्ड और विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के अन्य हिस्सों से मिले आंकड़ों के साथ जोड़ा गया। इससे OJ 287 के पिछले करीब 150 वर्षों के अध्ययन में सबसे व्यापक और सघन रूप से नमूना लिए गए ऑप्टिकल टाइम-सीरीज डेटा में से एक तैयार हुआ।

वैज्ञानिकों ने OJ 287 की चमक में होने वाले बदलावों को अलग-अलग समय-सीमाओं पर दर्ज किया। अध्ययन में वर्षों में होने वाले दीर्घकालिक बदलावों के साथ-साथ बहुत कम समय में होने वाले तेज परिवर्तन भी सामने आए।

दोनों ब्लैक होल एक-दूसरे की कक्षा में परिक्रमा कर रहे हैं। दोनों ब्लैक होल से संबंधित जेट दिख रहे हैं: बड़े ब्लैक होल का जेट लालिमा लिए हुए है, जबकि छोटे ब्लैक होल का जेट पीले रंग का है।
दोनों ब्लैक होल एक-दूसरे की कक्षा में परिक्रमा कर रहे हैं। दोनों ब्लैक होल से संबंधित जेट दिख रहे हैं: बड़े ब्लैक होल का जेट लालिमा लिए हुए है, जबकि छोटे ब्लैक होल का जेट पीले रंग का है।

OJ 287 की खासियत इसकी चमक में दिखाई देने वाला दोहरे शिखर वाला पैटर्न है। इस आवधिक व्यवहार की पहचान 1988 में फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने 1880 से करीब एक सदी तक किए गए ऑप्टिकल अवलोकनों के आधार पर की थी। इसके बाद से दुनिया भर के वैज्ञानिक इसके करीब 12 साल के चक्र में होने वाले चमकीले विस्फोटों का अध्ययन करते रहे हैं।

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केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान 3.89 अरब सौर द्रव्यमान से अधिक

अध्ययन में 21 अक्टूबर से 22 नवंबर 2017 के बीच अमेरिका की स्टीवार्ड वेधशाला से OJ 287 की निम्न-प्रवाह अवस्था में लिए गए आठ ऑप्टिकल स्पेक्ट्रा का भी विश्लेषण किया गया। [O III] उत्सर्जन रेखा की चौड़ाई के आधार पर केंद्रीय ब्लैक होल के द्रव्यमान का अनुमान लगाया गया।

इसके अनुसार केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान कम से कम 3.89 अरब सौर द्रव्यमान है।

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अध्ययन में दोनों ब्लैक होल की आपसी स्थिति, OJ 287 की चमक, स्पेक्ट्रम और ध्रुवीकरण में होने वाले बदलावों तथा छोटे ब्लैक होल से संभावित उत्सर्जन के संकेतों को समझने का प्रयास किया गया।

18 देशों के वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन

इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में भारत के अलावा बुल्गारिया, चिली, चीन, क्रीमिया, फिनलैंड, जॉर्जिया, जर्मनी, इटली, जापान, रूस, सर्बिया, स्पेन, स्वीडन, ताजिकिस्तान, ब्रिटेन, अमेरिका और वेस्ट इंडीज के वैज्ञानिक शामिल रहे। अध्ययन में 48 शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों की भागीदारी रही।

शोध में OJ 287 के विभिन्न तरंग दैर्ध्यों पर किए गए अवलोकनों को भी शामिल किया गया। इससे वैज्ञानिकों को इसकी उत्सर्जन प्रक्रिया और द्विआधारी ब्लैक होल प्रणाली के व्यवहार को समझने में मदद मिली।

अध्ययन के निष्कर्ष OJ 287 को अतिविशाल द्विआधारी ब्लैक होल, सापेक्षिक जेट और अलग-अलग प्रकार के खगोलीय संकेतों के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में सामने लाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, विभिन्न तरंग दैर्ध्यों में इसकी लगातार निगरानी से जेट की भौतिकी, द्विआधारी ब्लैक होल के व्यवहार और विद्युत चुम्बकीय तथा गुरुत्वाकर्षण तरंग संकेतों के बीच संभावित संबंधों को समझने में मदद मिल सकती है।

इससे पहले डॉ. ए.सी. गुप्ता और फिनलैंड के तुर्कू विश्वविद्यालय के प्रो. माउरी जे. वाल्टोनेन के नेतृत्व में 2017 से OJ 287 पर कई शोध पत्र प्रकाशित किए जा चुके हैं।