नई दिल्ली:भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और छात्र संगठनों के प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चल रही बयानबाजी के बीच अमेरिका का बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन विरोध-प्रदर्शनों को भारत का पूरी तरह से "आंतरिक राजनीतिक मामला" करार देते हुए किसी भी तरह की दखलअंदाजी या टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने वाले संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार विशेषज्ञों पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें 'विरोधाभास' (Oxymoron) बता दिया।
'हमारे देश में भी रोज होते हैं धरने, भारत एक जीवंत लोकतंत्र'
जब पत्रकारों ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए सवालों पर मार्को रुबियो से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने बेहद तीखे अंदाज में कहा, "ओह, यूएन एक्सपर्ट्स, मेरे पसंदीदा! दरअसल यूएन एक्सपर्ट्स शब्द अपने आप में ही एक विरोधाभास है।"
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रुबियो ने आगे कहा कि भारत एक मजबूत लोकतांत्रिक देश है, जहां नियमित तौर पर चुनाव होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, "यह उनका घरेलू राजनीतिक मसला है और मैं भारत के आंतरिक राजनीतिक मामलों पर अपनी कोई राय नहीं देने जा रहा। विरोध-प्रदर्शन तो हमारे यहां अमेरिका में भी हर रोज होते हैं।" उन्होंने यह भी साफ किया कि वह शांतिपूर्ण धरनों की बात कर रहे हैं, न कि यूरोप में दिखने वाले उन दंगों की जहां सार्वजनिक संपत्तियों को तोड़ा और जलाया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक विशेषज्ञों ने उठाए थे सवाल
विवाद की शुरुआत तब हुई जब जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक मानवाधिकार विशेषज्ञों ने दिल्ली में युवाओं और कॉकरोच जनता पार्टी सहित विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई थी। यूएन विशेषज्ञों ने आरोप लगाया था कि पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग कर रही है और असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने भारत सरकार से नागरिकों के शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा करने और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच की अपील की थी।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र को दिया करारा जवाब
दूसरी ओर, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय की उप सचिव बरखा ताम्रकार ने एक उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 21 जैसे मजबूत संवैधानिक और संस्थागत प्रावधान मौजूद हैं।
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भारतीय राजनयिक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ अधूरी रिपोर्टों और असत्यापित आंकड़ों के सहारे भारत की नकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भारत ने जोर देकर कहा कि मानवाधिकारों को राजनीतिक दबाव बनाने या किसी देश को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।


