शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
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भारत का अंदरूनी मामला: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों पर बोला अमेरिका, रुबियो ने UN को दिखाया आईना

भारत में चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आंतरिक मामला बताया है। यूएन विशेषज्ञों की आपत्ति पर रुबियो ने तंज कसा, वहीं भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में बेबुनियाद आरोपों को खारिज कर दिया।

भारत का अंदरूनी मामला: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों पर बोला अमेरिका, रुबियो ने UN को दिखाया आईना
भारत का अंदरूनी मामला: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों पर बोला अमेरिका, रुबियो ने UN को दिखाया आईना फोटो: विराट भारत
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नई दिल्ली:भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष और छात्र संगठनों के प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चल रही बयानबाजी के बीच अमेरिका का बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इन विरोध-प्रदर्शनों को भारत का पूरी तरह से "आंतरिक राजनीतिक मामला" करार देते हुए किसी भी तरह की दखलअंदाजी या टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने वाले संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानवाधिकार विशेषज्ञों पर तीखा तंज कसते हुए उन्हें 'विरोधाभास' (Oxymoron) बता दिया।

'हमारे देश में भी रोज होते हैं धरने, भारत एक जीवंत लोकतंत्र'

जब पत्रकारों ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए सवालों पर मार्को रुबियो से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने बेहद तीखे अंदाज में कहा, "ओह, यूएन एक्सपर्ट्स, मेरे पसंदीदा! दरअसल यूएन एक्सपर्ट्स शब्द अपने आप में ही एक विरोधाभास है।"

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रुबियो ने आगे कहा कि भारत एक मजबूत लोकतांत्रिक देश है, जहां नियमित तौर पर चुनाव होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, "यह उनका घरेलू राजनीतिक मसला है और मैं भारत के आंतरिक राजनीतिक मामलों पर अपनी कोई राय नहीं देने जा रहा। विरोध-प्रदर्शन तो हमारे यहां अमेरिका में भी हर रोज होते हैं।" उन्होंने यह भी साफ किया कि वह शांतिपूर्ण धरनों की बात कर रहे हैं, न कि यूरोप में दिखने वाले उन दंगों की जहां सार्वजनिक संपत्तियों को तोड़ा और जलाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक विशेषज्ञों ने उठाए थे सवाल

विवाद की शुरुआत तब हुई जब जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक मानवाधिकार विशेषज्ञों ने दिल्ली में युवाओं और कॉकरोच जनता पार्टी सहित विपक्षी दलों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई थी। यूएन विशेषज्ञों ने आरोप लगाया था कि पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग कर रही है और असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने भारत सरकार से नागरिकों के शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा करने और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच की अपील की थी।

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र को दिया करारा जवाब

दूसरी ओर, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय की उप सचिव बरखा ताम्रकार ने एक उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 21 जैसे मजबूत संवैधानिक और संस्थागत प्रावधान मौजूद हैं।

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भारतीय राजनयिक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ अधूरी रिपोर्टों और असत्यापित आंकड़ों के सहारे भारत की नकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भारत ने जोर देकर कहा कि मानवाधिकारों को राजनीतिक दबाव बनाने या किसी देश को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।

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दुनिया

किम जोंग-उन की मौत का दावा: बीजिंग में इलाज के दौरान तोड़ा दम? बहन किम यो-जोंग के हाथ में आई कमान

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन के ब्रेन हेमरेज से निधन की खबरों के बीच मुल्क में भारी सियासी उथल-पुथल मची है। दावों के मुताबिक, बीजिंग में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ा, जिसके बाद बहन किम यो-जोंग ने सत्ता की कमान पूरी तरह अपने हाथों में ले ली है। पढ़ें प्योंगयांग के अंदरूनी सत्ता संघर्ष की पूरी इनसाइड स्टोरी।

किम जोंग-उन की मौत का दावा: बीजिंग में इलाज के दौरान तोड़ा दम? बहन किम यो-जोंग के हाथ में आई कमान फोटो: विराट भारत

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन के अचानक निधन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सनसनी फैल गई है। सामने आ रही अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार, ब्रेन हेमरेज (सेरेब्रल हेमरेज) के चलते तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चीन की राजधानी बीजिंग स्थित 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जनरल हॉस्पिटल 301' में भर्ती कराया गया था, जहाँ कई दिनों के इलाज के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि उनके पार्थिव शरीर को बेहद गोपनीय सुरक्षा घेरे में वापस प्योंगयांग पहुँचा दिया गया है। इस सुरक्षा व्यवस्था में उत्तर कोरिया के सेंट्रल गार्ड कमांड के साथ चीनी सरकार की झोंगनानहाई गार्ड यूनिट और 82वें ग्रुप आर्मी के विशेष दस्ते शामिल रहे।

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पंजाब

पेरिस से लौटते ही भगवंत मान के बैग की तलाशी: 50,000 की पेनल्टी पर बवाल, AAP और अकाली दल आमने-सामने

पेरिस दौरे से लौटे पंजाब के सीएम भगवंत मान को दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम्स ने 3 घंटे तक रोके रखा और 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। लगेज चेकिंग और जुर्माने को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र पर राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाया, वहीं अकाली दल ने सवाल खड़े किए हैं। पढ़ें दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे की पूरी इनसाइड स्टोरी।

पेरिस से लौटते ही भगवंत मान के बैग की तलाशी: 50,000 की पेनल्टी पर बवाल, AAP और अकाली दल आमने-सामने फोटो: विराट भारत

चंडीगढ़। पेरिस दौरे से वतन लौटे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 19 अक्टूबर की देर रात दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर भारी फजीहत का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर कस्टम्स विभाग ने उन्हें करीब तीन घंटे तक रोके रखा और अंततः 50,000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया। सीएम अपनी पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर के साथ एयर फ्रांस की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे थे। वह फ्रांस में आयोजित 'सियाल पेरिस' अंतरराष्ट्रीय फूड फेस्टिवल में पंजाब के कृषि उत्पादों (राजमा और छोले) के प्रचार-प्रसार के लिए गए हुए थे।

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