हरियाणा के पावर सेक्टर में एक ऐतिहासिक बदलाव के साथ बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक टकराव खड़ा हो गया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने राज्य में पहली बार किसी निजी कंपनी को सीधे उपभोक्ताओं तक बिजली आपूर्ति का वितरण लाइसेंस जारी कर दिया है। प्राथमिक चरण में 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को गुरुग्राम और नूंह जिलों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के समानांतर बिजली आपूर्ति करने की अनुमति दी गई है।
इस फैसले के सामने आते ही बिजली निगम के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने इसे निजीकरण की ओर कदम बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त मोर्चे और हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इसे जन-विरोधी फैसला करार देते हुए 20 अक्टूबर से विरोध प्रदर्शन और 22 से 24 अक्टूबर तक 3 दिवसीय पूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
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एसोसिएशन के महासचिव रविंद्र घणघस के अनुसार, चुनिंदा और मुनाफे वाले शहरी क्षेत्रों में निजी कंपनी को एंट्री देना सरकारी निगम की वित्तीय स्थिति की कमर तोड़ देगा। दूसरी ओर, राजनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज है; ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया है कि सरकार आयोग के इस आदेश के खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दाखिल करेगी।
तकनीकी मोर्चे पर निजी कंपनी पारंपरिक ढांचे के मुकाबले आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का दावा कर रही है। कंपनी पुरानी 11 kV लाइनों के बजाय 33 kV का प्राइमरी डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार करेगी, जो चार गुना अधिक लोड संभालने में सक्षम है। शहरी क्षेत्रों में बड़े सब-स्टेशनों के स्थान पर कॉम्पैक्ट जीआईएस सब-स्टेशन और भूमिगत केबल बिछाई जाएंगी। वहीं आंधी-तूफान के दौरान ग्रामीण व बाहरी इलाकों में फॉल्ट रोकने के लिए कवर्ड कंडक्टर तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
फिलहाल उपभोक्ताओं के सामने विकल्प का रास्ता खुलता दिख रहा है, लेकिन कर्मचारियों का उग्र आंदोलन और सरकार का कानूनी रुख इस पूरी योजना के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है।








