नई दिल्ली। भारत में स्वच्छ ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) का दायरा तेजी से विस्तार ले रहा है। देश में अब तक 308 गीगावॉट (GW) गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी सबसे प्रमुख है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सचिव संतोष सारंगी के अनुसार, सरकार का फोकस अब केवल प्लांट लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और बड़े पैमाने पर वैश्विक निवेश आकर्षित करने पर है। इसी रणनीति के तहत राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 2 से 5 नवंबर 2026 तक ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो’ (BRE समिट) का आयोजन किया जा रहा है।
2030 तक 220 अरब डॉलर के निवेश की दरकार
मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2027 से 2030 के बीच स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को गति देने के लिए करीब 220 अरब डॉलर की विशाल पूंजी की आवश्यकता होगी। इतनी बड़ी धनराशि जुटाने के लिए सरकार केवल बजटीय सहायता पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि घरेलू व विदेशी बैंकों, प्राइवेट इक्विटी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय पेंशन फंड्स को जोड़ने की योजना है।
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आगामी BRE समिट में वित्त मंत्रालय, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के पक्षकार और कनाडा के पेंशन फंड समेत कई दिग्गज वैश्विक निवेशक जुटेंगे। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य ऐसे दीर्घकालिक निवेशकों को साथ लाना है, जो भारतीय ऊर्जा परियोजनाओं में लंबे समय तक पूंजी बनाए रख सकें।
इस साल भी 56 गीगावॉट नई क्षमता जोड़ने का लक्ष्य
क्षमता विस्तार के मोर्चे पर भारत लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में देश ने रिकॉर्ड 56 गीगावॉट क्षमता जोड़ी थी और मौजूदा वर्ष में भी 55 से 56 गीगावॉट नई स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जोड़ने की तैयारी है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि केवल क्षमता बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि उस बिजली को सही समय पर ग्रिड तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण (बैटरी स्टोरेज) और बेहतर वितरण नेटवर्क पर काम करना बेहद जरूरी हो गया है। निवेशक भी उन्हीं परियोजनाओं में रुचि दिखा रहे हैं जो ग्रिड संतुलन और व्यावसायिक दृष्टि से सुरक्षित हों।
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सोलर मॉड्यूल में भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता
घरेलू विनिर्माण के मोर्चे पर भी देश को बड़ी कामयाबी मिली है। संतोष सारंगी के मुताबिक, भारत सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है, जबकि पवन ऊर्जा टरबाइन निर्माण में देश चौथे पायदान पर है।
आयात पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करने के लिए सरकार अब सोलर पैनल के सबसे अहम कच्चे माल—पॉलीसिलिकॉन—के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नई प्रोत्साहन नीतियों और 'मॉडल एवं निर्माता की स्वीकृत सूची' (ALMM) के दायरे को पॉलीसिलिकॉन तक बढ़ाने पर हितधारकों से विमर्श चल रहा है।
डेटा सेंटर्स और AI से सुधरेगा बिजली नेटवर्क
डिजिटल दौर में डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करना एक नई चुनौती बनकर उभरा है। आगामी समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से स्मार्ट पावर मैनेजमेंट पर विशेष सत्र होंगे। AI तकनीक के जरिए बिजली की खपत का सटीक पूर्वानुमान लगाने और ग्रिड लोड को बिना रुकावट नियंत्रित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी, जिससे डेटा सेंटर्स को 24 घंटे निर्बाध और पर्यावरण-अनुकूल बिजली मिल सके।






