दिल्ली: पलवल: सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली-एनसीआर के आसमान पर स्मॉग और जहरीली हवा का संकट मंडराने लगा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक के गिरते स्तर को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पूरे क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप का पहला चरण लागू कर दिया है। इसका सीधा असर अब हरियाणा के सीमावर्ती जिलों में दिखने लगा है, जहां जिला प्रशासन ने प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों पर नकेल कसने की तैयारी पूरी कर ली है।
पलवल के उपायुक्त डॉ. जयेन्द्र सिंह छिल्लर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को 'हाई अलर्ट' मोड पर काम करने का फरमान सुनाया है। प्रशासन ने साफ किया है कि हवा की सेहत बिगाड़ने वाले कारकों से किसी भी सूरत में रियायत नहीं बरती जाएगी। विशेष रूप से निर्माण एवं तोड़फोड़ स्थलों से उड़ने वाली धूल, मलबे का अवैध डंपिंग और खुले में कचरा या सूखी पत्तियां जलाने की घटनाओं पर फ्लाइंग स्क्वॉड नजर रखेंगे।
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प्रशासनिक सख्ती के बीच डीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वायु गुणवत्ता की रक्षा केवल सरकारी मशीनरी के बूते संभव नहीं है, इसके लिए जनसहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने नागरिकों से निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने और वाहनों का समय पर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र अपडेट रखने का आह्वान किया है। ग्रैप-1 की संशोधित गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों और एजेंसियों पर पर्यावरण नियमों के तहत भारी जुर्माना लगाने की तैयारी है।



